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Ancient stepwell – मोटी माता मंदिर के समीप स्थित है 200 साल पुरानी बावड़ी

35 हजार रुपए में हुआ था बावड़ी का निर्माण

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 ancient stepwell

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बड़वानी. शहर में कई रियायतकालीन निर्माण कार्य अपने में इतिहास की कहानियां लिए आज भी खड़े हैं। इन्हें देखकर आज भी पुराने समय की यादें ताजा हो जाती है। आज हम आपको बताएंगे शहर के मोटी माता के समीप बनी करीब 200 साल पुरानी बावड़ी के निर्माण के बारे में। रियासतकालीन इस बावड़ी में लगे शिलालेख के अनुसार इसका जीर्णोद्धार सन 1878 में कराया गया था। इस शिलालखे पर शिलालेख पर बावड़ी के निर्माण संबंधी जानकारी दी गई है। जिसमें लिखा है सुधी पत्र श्रीगणेशायनम: जी श्री राजराजेश्वरी विक्टोरिया पार्क जता पारक लार्ड लीटन श्रीमहाराज धानी कलकत्ता के महाराणा जसवंतसिंहजी व इंदरसिंह साहब दीवान नजफखान बा इनकी हुकुमत से मारु नाथाजी चि. रुपचंद, नराण, पेमाजी, भूराजी मारु सेठ चि. दगड़ व हीरालाल इन्होंने सर्वलोक त्रिषा निवारण यह बावड़ी गुमास्ता रघुनाथ जम्बू ब्राह्मण इनकी अनुमति से 35000 रुपए लगाकर बनाई। कारीगर शेख अली कुक्षी वालों ने बनाई। श्री संवत 1935 कार्तिक सुदी 1 सन 1878 सूचिपत्र टूटफूट हो जाने से श्री हीरालालजी के पुत्र कालूराम ने नये सिरे से खुुदवाकर लगाया। कार्तिक सुदी संवत 2026। ये जानकारी शिलालेख पर दर्ज है जो साफ पढ़ी जा सकती है। इस बावड़ी में दो स्थानों पर शिवलिंग की स्थापना भी है। जहां आज भी पूजन होता है।

बाहर के व्यापारी करते थे पानी का उपयोग
पूर्व कुलपति व इतिहासकार डॉ. एसएन यादव ने बताया कि इस बावड़ी का निर्माण 1820 या 1825 में हुआ होगा। उसके बाद इसके जीर्णशीर्ण हो जाने पर सन 1918 में इसका जीर्णोद्धार कर नया शिलालेख हीरालालजी के पुत्र कालूराम ने लगाया था। इस बावड़ी का उपयोग बाहर से आने वाले लोग अधिक करते थे। बाहर से खरीदी या अन्य कार्य करने वाले लोग मोटी माता के सामने खाली स्थान पर पड़ाव वाले खाली स्थान पर रूकते थे। ये लोग यहां कई बार रात भी रूकते थे। इसके पानी का उपयोग करते थे। वहीं शहर के लोग भी इस पानी का उपयोग पीने के लिए करते थे। उस समय नल की व्यवस्था नहीं थी। लोग बावडिय़ों के सहारे ही पेयजल की व्यवस्था करते थे।