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डूब प्रभावितों का संघर्ष- नर्मदा पट्टी के डूब में फंसे 4 गांव के लोग एक नाव के सहारे

प्रशासन ने टापू बने गांवों के लोगों के लिए नहीं की पर्याप्त व्यवस्थाडूब में समाए चार गांवों के लिए प्रशासन ने अटैच की सिर्फ एक नाव

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Submergence area of Narmada belt

Submergence area of Narmada belt

बड़वानी. नर्मदा पट्टी के गांवों में आई डूब के बाद कई गांव और खेत टापू बने हुए हैं। ऐसे में प्रशासन ने चार गांवों के बीच एक-एक नाव को अटैच किया है। इससे डूब प्रभावितों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चार गांवों के बीच एक नाव होने से कई बार लोगों को समय पर नाव नहीं मिल पाती। पिछले साल आई डूब के दौरान प्रशासन ने हर गांव के लिए एक नाव की व्यवस्था की थी और इस साल महज औपचारिकताओं की पूर्ति की जा रही है। डूब गांवों में लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए यहां के नाविक और केवट अपनी नावों से लोगों की सहायता करने में लगे हुए हैं। ये नाविक और केवट अपनी निजी नावों से डूब प्रभावित लोगों को आ और ले जा रहे हैं। फिलहाल नर्मदा का जलस्तर 136.400 मीटर बना हुआ है।

प्रभावितों ने मनाया अन्याय दिवस
बुधवार शाम को राजघाट टापू पर बिना पुर्नवास रह रहे डूब प्रभावितों ने अन्याय दिवस भी मनाया। इस मौके पर सभी महिला, पुरुष और बच्चों ने मशाल जलाकर अन्याय के खिलाफ आखिर दम तक लडऩे और अपने अधिकार प्राप्त करने का संकल्प लिया। उल्लेखनीय है की पिछले साल 10 सितंबर 2019 को प्रशासन ने पुनर्वास का झूठा आश्वासन देकर इन प्रभावितों को गांव से हटाकर टीन शेड में भेज दिया था। आज एक साल पूरा हो जाने के बावजूद एक भी प्रभावित का पुनर्वास नहीं किया गया। प्रभावित सन्तोष दरबार, लोकेंद्र दरबार, जयदीप दरबार, ज्योति, छाया आदि ने सरकार द्वारा की गई यह धोखाधड़ी को सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना बताया उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने ग्रुप के पहले समस्त प्रभावितों के पुनर्वास का आदेश दिया था।

पिछले साल जहां रास्ते बंद हो रहे थे, वहां के लिए नावें अटैच की थी। इस साल नावों का पूरा काम प्रशासन के अंडर में है।
- एसएस चंगौड़, कार्यपालन यंत्री एनवीडीए बड़वानी

पिछले साल आई डूब से कई गांव प्रभावित थे। लोग गांवों में रह रहे थे इसलिए ज्यादा नावें लगाई थी। इस साल जहांं पानी बढ़ रहा है, उस हिसाब से नावें लगा रहे हैं। समस्या आएगी तो नावें बढ़ा देंगे।
- घनश्याम धनगर, एसडीएम