
Marigold crop
बड़वानी. कोरोना काल के बाद से कई लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है। लॉकडाउन के बाद से सबसे ज्यादा किसानों की खेती-बाड़ी प्रभावित हुई है। इस साल फूलों का कारोबार करने वाले लोगों को भी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना काल में हुए लॉकडाउन में फूलों की बहार अपने पूरे शबाब पर थी, तब इनके लिए बाजार खुला नहीं था। उस दौरान शहर के समीप माली मोहल्ले के मालियों को फूल फेंकना पड़े थे। उसके बाद लॉक डाउन खुला तो दूसरे रोपे लाकर इन्होंने खेतों में लगाए, लेकिन इन पर वायरस का असर आ जाने से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। इन दिनों हालत ये है कि त्योहारी सीजन में इनके पास फूल नहीं है। कई माली तो बाहर से महंगे दामों में फूल लाकर बेच रहे हैं। उसमें इन्हें मुनाफा बहुत कम मिल रहा है। जिससे इनकी आय बहुत हद तक प्रभावित हुई है। माली समाज के बुजुर्ग हरी गेहलोत ने बताया कि ये पूरा साल सबके लिए घाटा देने वाला ही रहा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ऐसी हालत है कि मजदूरों की मजदूरी भी नहीं निकल पा रही है। ऐसे में आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।
17 से ज्यादा परिवार करते हैं फूलों की खेती : माली मोहल्ला में 17 से ज्यादा परिवार फूलों की खेती कर अपना घर चलाते हैं। इस साल इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यहां करीब 15 एकड़ से अधिक जमीन में फूलों की खेती होती है। ये रतलाम या अन्य स्थानों से फूलों के रोपे और बीज लाकर अपने खेतों में पौधे तैयार करते हैं। इसमें इन्हें खासा खर्च भी लगता है। इस साल इन्हें लाखों रुपए खर्च करने पड़े, लेकिन आवक बिल्कुल नहीं हुई है। हरी गेहलोत ने बताया कि फूलों की नुकसानी को लेकर कई बार आवेदन भी दिए, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नुकसानी के बाद उन्हें शासन स्तर से कोई सहयोग नहीं मिलता है।
लगाते हैं कई तरह के फूल
माली मोहल्ला के किसान हर साल अपने खेतों में कई प्रकार के फूलों के पौधे और बीज लगाकर उपज लेते हैं। यहां गुलाब, रजनीगंधा, मोगरा, गेंदा व अन्य प्रकार के फूलों की खेती करते हैं। वहीं कुछ हिस्से में मिर्च और सब्जियां भी लगाते हैं। इस साल वायरस के कारण इनकी सभी फसलें प्रभावित हुई है। इससे इन्हें खासा नुकसान उठाना पड़ा है।
महंगे दामों में बुला रहे हैं फूल
फूलों की खेती बर्बाद हो जाने के बाद माली समाज के लोग अब बाहर से महंगे दामों में फूल बुलाकर मालाएं और फूल बेच रहे हैं। माली मोहल्ला के रघुनंदन गेहलोत ने बताया कि गेंदा फूल 120 से 150 रुपए के भाव में रतलाम और इंदौर से बुला रहे हैं। इससे फूल मालाएं महंगी हो गई है। रघुनंदन गेहलोत ने बताया कि त्योहारी सीजन होने के कारण महंगे दामों में फूल लाना मजबूरी हो गई है। उन्होंने बताया कि पहले जब यहां फूलों का उत्पादन होता था तो शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में फूल यहीं से पहुंचाए जाते थे। इस बार फसल खराब होने के कारण बाहर से फूल लाने पड़ रहे हैं।
Published on:
11 Nov 2020 06:10 pm
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