—कम लागत में मिलता अधिक मुनाफा—दो महीने में फसल के लग जाती है तुरई साधारण सी दिखने वाली हरी तोरई की सब्जी इन दिनों किसानों को मालामाल कर रही है। आमेर तहसील के ग्राम भूरथल में किसान लक्ष्मण मौहनपुरिया इससे लाखों की कमाई कर रहे हैं। वे फसल को बढ़ारणा मंडी बेचते हैं। वहां से यह प्रदेश की अनेक मंडियों में पहुंचती है।
मल्ची व ड्रिप सिस्टम से मिट्टी में नमी
किसान लक्ष्मण मोहनपुरिया ने बताया कि मल्ची व ड्रिप सिस्टम के उपयोग से फ सल को कम पानी की जरूरत होती है। मल्ची के उपयोग से मिट्टी में नमी बनी रहती है। इस फ सल को पंद्रह दिन में एक बार पानी देने की आवश्यकता होती है।
दस से बारह फीट की ऊंचाई में बढ़ता
तोरई की फ सल में स्ट्रक्चर तैयार करना महत्वपूर्ण है। इस स्ट्रक्चर के सहारे तोरई का पौधा दस से बारह फ ीट की हाइट में बढ़ता है। स्ट्रक्चर से किसानों को फ ल तोडऩे में भी सुविधा रहती है । खड़े-खड़े ही फ ल तोड़ लिए जाते हैं। इसके साथ ही कीटाणुनाशक दवाइयां देने में भी सुविधा रहती है। तोरई स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर होती है।
55-60 दिनों में तैयार होता फल
तोरई के पौधे बीजों से उगाना आसान होता है। रोपण के लगभग दो माह बाद इसमें फूल दिखाई देने लगते हैं। ये जल्द ही फलों में बदल जाते हैं। छ: इंच लम्बी होने पर इसकी तुड़ाई की जा सकती है। कीटों से बचाव के लिए हर 10 दिनों में नीम के तेल का छिड़काव करें।
जितेन्द्र कुमार सैन — जयपुर