गोविंदगढ़ में चौगान स्टेडियम खेल परिषद के अधीन राजकीय रामगोपाल कानूनगो स्टेडियम को सालों से सुविधाओं का इंतजार है तो चौमूं के खेल स्टेडियम की स्थिति भी ठीक नहीं है।
कैलाश बराला/गजानंद यादव
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का गुरुवार को जन्मदिन है। हर वर्ष की तरह इस बार भी खेल दिवस मनाया जा रहा है। खेलों पर सरकार भी हर साल लाखों रुपए खर्च करती है, लेकिन चौमूं उपखंड के दो खेल स्टेडियम सरकार की उपेक्षा के शिकार हो रहे है। यहां न तो खेल प्रशिक्षक लगा रखे है और ना ही खेलों के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है। इनकी स्थिति दयनीय एवं सुविधा विहीन है। ऐसे युवा खेलों से दूर होते जा रहे है। इन परिस्थितियों में क्षेत्र के लालों के परिजनों को मलाल है कि उनके बच्चे कैसे कमाल दिखाएं। स्थिति यह है कि गोविंदगढ़ में चौगान स्टेडियम खेल परिषद के अधीन राजकीय रामगोपाल कानूनगो स्टेडियम को सालों से सुविधाओं का इंतजार है तो चौमूं के खेल स्टेडियम की स्थिति भी ठीक नहीं है। गोविंदगढ़ में चार साल पहले खेल प्रशिक्षक हटा लिए गए थे, लेकिन वापस नहीं लगाए गए।
देखरेख के लिए कोई धणीधोरी नहीं
जानकारी अनुसार चौमूं में वीर हनुमान मार्ग के पास शहर की 90 हजार की आबादी सहित आसपास के गांवों के युवाओं को लाभांवित करने को लेकर सालों पहले लाखों रुपए की लागत से खेल स्टेडियम का निर्माण कराया था, लेकिन देखरेख के लिए कोई धणीधोरी नहीं है। सार-संभाल के अभाव में पिछले साल यहां बने भवन के दरवाजों के कुंदे समाजकंटक तोड़ ले गए थे। कमरों में शराब की खाली बोतलें और गंदगी पसरी रहती है। पिछले चुनाव के दौरान कुछेक कार्यक्रम होने के दौरान जरूर भवन पर रंगरोगन कर दिया था। मैदान में खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के ठहरने के लिए कमरे भी बनाए थे, लेकिन आज दिन तक प्रशिक्षक लगाए ही नहीं गए। इधर, खेल मैदान की स्थिति भी अच्छी नहीं है। कई बार युवा नगरपालिका प्रशासन से व्यवस्था में सुधार के साथ प्रशिक्षक लगवाने की मांग कर चुके है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
चार साल से नहीं कोच
यहां गोविंदगढ़ खेल स्टेडियम में पहले विभिन्न खेलों के खेल परिषद की ओर से प्रशिक्षक लगाए थे, लेकिन करीब चार साल पहले इन्हें भी हटा दिए। यहां स्टेडियम में चार साल कोच नहीं है। स्टेडियम की सुरक्षा के लिए कर्मचारी नहीं होने का नतीजा है कि यहां के भवन में शाम होते ही समाजकंटकों का भी जमावड़ा लगता है। स्टेडियम में लगे खेल उपकरण भी ठीक नहीं है।
इन खेलों के कोच का इंतजार
गोविंदगढ़ स्थित राजकीय स्टेडियम में कबड्डी, खो खो, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, क्रिकेट, कुश्ती, बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी, टेबल बॉल क्रिकेट, शूटिंगबॉल सहित अन्य खेलों के कोच नहीं होने से स्टेडियम में आने वाले खिलाड़ियों को लाभ नहीं मिल रहा है।
स्कूलों में भी मैदान बदहाल
स्कूलों में खेल मैदानों की भी बात की जाए तो इनकी भी स्थिति ठीक नहीं है। कईयों पर अतिक्रमण है तो कई जगह सुविधा विहीन है। यहां चीथवाड़ी के राजकीय लक्ष्मीनाथ वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालय के खेल मैदान को चारदीवारी का इंतजार है। मेदान में घास फूंस उगा हुआ है तो उबड़ खाबड़ भी बना है। मोरीजा राउमावि के खेल मैदान को भी विकास की दरकार है।
इनका कहना है…
हां, खेल स्टेडियम में संसाधन जुटाए जाएंगे। प्रशिक्षक लगाए जाने को लेकर सरकार को पत्राचार किया जाएगा। ताकि युवाओं को खेलों में प्रशिक्षण मिल सके। विकास को लेकर भी मांग की जाएगी।
-विष्णुकुमार सैनी, सभापति, नगर परिषद चौमूं
खेल स्टेडियम में विकास को लेकर सरकार से मांग की जाएगी। उक्त खेल स्टेडियम जिला खेल परिषद के अधीन है। प्रशिक्षक लगाए जाने को लेकर भी उच्च स्तर पर वार्ता की जाएगी।
-रामस्वरूप यादव, प्रधान, गोविंदगढ़