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मां की जगह सौंपा अन्य का शव, पैसा नहीं देने पर दूसरे परिवार को शव देने से इनकार

शहर के एमपीएम अस्पताल का मामला, पत्रिका की दखल के बाद दोनों परिवारों को मिले अपनों के शव

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Ajay Shrivastava

Jul 19, 2016

management negligence

Ruckus and police came

जगदलपुर.
शहर के एमपीएम अस्पताल में रविवार की रात मानवता को शर्मसार करने वाला मामला प्रकाश में आया है। अस्पताल प्रबंधन ने एक बेटे को मां की जगह अन्य का शव सौंप दिया, वहीं दूसरी तरफ इलाज का पैसा नहीं करने पर एक अन्य परिवार को शव देने से मना कर दिया। पत्रिका की दखल के बाद देर रात परिवार वालों को अपनों के शव दिए गए, जिन्हें लेकर वे गांव के लिए रवाना हुए। इस दौरान हंगामा व पुलिस भी पहुंची।


सुकमा जिले के झिरमपाल की दासी बाई (45 साल) को सीने में दर्द व सांस लेने में तकलीफ के चलते शुक्रवार को शहर के एमपीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी अस्पताल में सुकमा जिले की ही तालनार निवासी सुकरी पांडे (23 साल) भी मलेरिया का इलाज रवा रही थी।


इस बीच सुकरी पांडे की इलाज के दौरान रविवार दोपहर तीन बजे मौत हो गई। इसके बाद दासी बाई ने भी रविवार की रात करीब साढ़े सात बजे दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के चलते दासी बाई के परिजनों को सुकरी का शव सौंप दिया और सुकरी के परिजनों को इलाज के लिए राशि का भुगतान करने के बाद ही शव देने की बात कही।


शव से कपड़ा हटाते ही बेटे के उड़े होश

मां की मौत से शोकाकुल परिवार कपड़े से लिपटे शव को वाहन से गांव ले जा रहा था तभी कुछ दूर जाने के बाद पुत्र विनोद ने नम आंखों से मां के सिर से कपड़ा हटाया तो उसकी जगह अन्य का शव देख उसके होश उड़़ गए। हैरान परेशान परिवार वहीं से एमपीएम अस्पताल पहुंचे प्रबंधन से शिकायत की। इस पर प्रबंधन ने उल्टे उन्हीं पर दोष मढ़ते हुए विनोद से कहा कि गलती आपकी है। जानकारी मिलने के बाद पत्रिका टीम पहुंची तब इस मामले का पूरा खुलासा हुआ।


स्मार्ट कार्ड जमा फिर भी दस हजार की मांग

अस्पताल में सुकरी का इलाज स्मार्ट कार्ड से मिलने वाली राशि से हो रहा था। परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव देने के एवज में 10 हज़ार मांगें । सुकरी का शव किसी और को सौंपे जाने से अनजान परिजन राशि का इंतजाम करने के लिए इधर उधर भटकते रहे, लेकिन कहीं से भी उन्हें मदद नहीं मिली।


सुकरी की जगह दासी का स्टोर रूम में शव

इलाज की राशि नहीं मिलने पर प्रबंधन ने सुकरी की जगह दासी का शव स्टोर रूम में रखा था। खुलासे के बाद दासी का शव परिजनों को सौंपकर उसकी जगह सुकरी का शव रखा गया। पत्रिका टीम की दखल के बाद देर रात करीब 2 बजे स्टोर रूम खुलवाकर य्परिजनों को उसका शव सौंप दिया गया।


हरिश कवासी ने कहा, खून चूस रहे डॉक्टर

शवों की अदला बदली का यह मामला उनका क्षेत्र का होने कारण जानकारी मिलते ही सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी एमपीएम अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि यहां के डॉक्टर खून चूस रहे हैं। इलाज की राशि नहीं देने पर शव देने से मना करना निंदनीय है।