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खतरे में घाघरा नदी पर बना बांध, खौफ के साये में लोग 

दुबौलिया के बीडी बांध से लेकर करीब 7 किलोमीटर तक पूरे बांध की स्थिति काफी भयावह, जगह जगह रैन कट और रैट होल से बांध जर्जर

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Ahkhilesh Tripathi

Jun 23, 2016

Ghagra river dam

Ghagra river dam

बस्ती. जिले में घाघरा नदी के किनारे बने बांध की सालों से मरम्मत न होने से आस पास के हजारों लोग खौफ के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। दुबौलिया थाना क्षेत्र के बीडी बांध से लेकर करीब 7 किलोमीटर तक पूरे बांध की स्थिति काफी भयावह हो गई है, जगह जगह रैन कट और रैट होल से बांध जर्जर हो चुका है। इतना ही नहीं घाघरा की तबाही को रोकने के लिये बने स्पर भी क्षतिग्रस्त हो गये हैं।

हर साल होती है तबाही:
बांध को पक्का बनाने के बजाये बांढ खंड की अधिकारियों ने उसे कच्चा बनाया, जिस वजह से साल दर साल मिट्टी से बना होने की वजह से बांध की स्थिति भयवाह होती जा रही है। विकास खंड का देवारा गंगबरार गांव जो कि बीडी तटबंध व घाघरा नदी के बीच बसा है। यहां के बाशिदों को अपना जीवन शरणार्थी बनकर बिताना पड़ रहा है। वर्षों हो गए न तो इनकी प्रशासन ने समझी और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने ही सुनी। साल के आठ महीने जी तोड़ मेहनत कर यह अपना आशियाना बनाते हैं, लेकिन घाघरा की लहरें उनकी आंखों के सामने ही उनके घर उजाड़ देती है। करीब ढाई सौ की आबादी वाला यह गांव चार महीने घाघरा की भयंकर त्रासदी झेलता है।

dam in dangerous condition











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सड़कों पर जिंदगी गुजारते हैं लोग
यहां के ग्रामीणों को जनपद अम्बेडकरनगर, फैजाबाद व वीडी बांध तथा सड़कों पर जिंदगी गुजारनी पड़ती है। इस गांव के लोगों को सरकारी मदद पाने की उम्मीद पूरी तरह टूट चुकी है, अपने कुनबे का भरण-पोषण करने के लिए पीड़ितों के आगे मजदूरी के अलावा और कोई रास्ता नही है। जिस दिन मजदूरी मिलती है उस दिन घर का चूल्हा जलता है और जिस दिन नही मिलती उस दिन ठंडा ही रहता है।

ग्रामीणों को नहीं मिला है मुआवजा
पिछले 30 साल पूर्व गांव के दो दर्जन से अधिक लोगो ने बांध बनाने के लिये अपनी जमीन सरकार को दे दी लेकिन आज उन्हें मुआवजा नहीं मिला। जिसके बाद तमाम जन प्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने इन्हें मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया लेकिन आज मुआवजे के नाम पर फूटी कौड़ी भी नही मिली।

विक्रमजोत धुंसवा तटबंध पर भिउरा गांव से चांदपुर तक की एक किलोमीटर की दूरी बाढ़ की दृष्टि से इस साल काफी
संवेदनशील है। यहां वीडी बांध को बचाने के लिए एक दर्जन स्पर व ठोकर बनाए गए हैं। इन स्परों व ठोकरों को भी बनाने में विभाग ने खेल कर दिया है। इनका अधिकांश हिस्सा मिट्टी अधिक व कम बोल्डर से बनाया गया है। मरम्मत न होने से
इनका होना न होना कोई मायने नहीं रखता। बाढ़ सिर पर होने के बाद भी इनकी मरम्मत की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अधिकारियों का नहीं है ध्यान:
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस बार बाढ़ आई तो यह स्पर और ठोकर तो बह ही जाएंगे वीडी बांध भी कट जाएगा। विकास खंड के भिउरा व चांदपुर गांव के निकट पिछले दो वर्षो से लगातार घाघरा नदी भयंकर कटान करते हुए वीडी तटबंध को अपने आगोश में लेने को आतुर है। भिउरा से लेकर चांदपुर तक करीब एक किलोमीटर तक खतरनाक स्थिति बनी हुई है, पर
जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।

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