बांध को पक्का बनाने के बजाये बांढ खंड की अधिकारियों ने उसे कच्चा बनाया, जिस वजह से साल दर साल मिट्टी से बना होने की वजह से बांध की स्थिति भयवाह होती जा रही है। विकास खंड का देवारा गंगबरार गांव जो कि बीडी तटबंध व घाघरा नदी के बीच बसा है। यहां के बाशिदों को अपना जीवन शरणार्थी बनकर बिताना पड़ रहा है। वर्षों हो गए न तो इनकी प्रशासन ने समझी और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने ही सुनी। साल के आठ महीने जी तोड़ मेहनत कर यह अपना आशियाना बनाते हैं, लेकिन घाघरा की लहरें उनकी आंखों के सामने ही उनके घर उजाड़ देती है। करीब ढाई सौ की आबादी वाला यह गांव चार महीने घाघरा की भयंकर त्रासदी झेलता है।