जानिए, राजकिशोर सिंह कैसे बन गए 'बाहुबली' क्षत्रीय नेता

जानिए, राजकिशोर सिंह कैसे बन गए 'बाहुबली' क्षत्रीय नेता

राजकिशोर सिंह पिछले 15 साल से लगातर बस्ती के हरैया विधानसभा से विधायक हैं और लगातार तीन बार वे कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं

बस्ती. सामान्य परिवार से सबंध रखने वाले प्रदेश के बाहुबली मंत्री राजकिशोर सिंह को जब तीन दिन पूर्व यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया, तो प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। राजकिशोर सिंह के गॉड फादर कहे जाने वाले काबिना मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने अपने चहेते की पैरवी करनी चाही, तो मुख्यमंत्री ने शिवपाल को ही पैदल कर दिया और कैबिनेट से उनकी छुटटी कर उन्हें संगठन का काम सौंप दिया। बता दें कि राजकिशोर सिंह पिछले 15 साल से लगातर बस्ती के हरैया विधानसभा से विधायक हैं और लगातार तीन बार वे कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।



लेकिन जब राजकिशोर की सम्पत्ति दिन दोगुनी और रात चैगुनी बढ़ने लगी, तो इस बात की जानकारी सीएम तक भी पहुंची। यूपी से लेकर दिल्ली और मुबंई के इलाको में जमीन की खरीद फरोख्त ने राजकिशोर सिंह को सबकी नजरो में ला दिया और इस बात की शिकायत गोपनीय तौर पर केन्द्र सरकार से हो गई। जब तक राजकिशोर के काले धन की जांच शुरू होती, उससे पहले ही मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने कैबिनेट से ही टर्मिनेट कर दिया। राजकिशोर सिंह का 14 साल से अधिक का राजनीतिक कैरियर काफी उतार चढ़ाव रहा है। इस दौरान जहां उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर क्षेत्र में कद्दावर और दबंग नेता की पहचान कायम की, तो वहीं उन पर बसपा शासनकाल में गैंगेस्टर एक्ट भी लगा। उन पर परिवार के लोगों को राजनीति में बढ़ाने के साथ ठेको में दखलअंदाजी करने का आरोप लगा।




जिले में उनके गृह निवास चंगेरवा का विकास होने की चर्चा आम है। हालांकि बस्ती को विकास प्राधिकरण का दर्जा दिलवाने का श्रेय भी उन्हें ही मिला। बाहुबली मंत्री राजकिशोर सिंह के राजनीतिक सफर की शुरूआत एपीएनपीजी डिग्री कॉलेज से छात्र नेता के तौर पर हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2002 में पहली बार वे जिला पंचायत सदस्य बने। इसी वर्ष वे उपाध्यक्ष का चुनाव भी लड़े मगर हार गये। जिला पंचायत सदस्य रहते उन्होंने बीएसपी के टिकट पर हरैया से चुनाव लड़ा और वे जीत भी गये।



वर्ष 2003 में बसपा के बागी विधायक के रूप में वे मुलायम सिंह के साथ जा मिले और उनके मंत्री मंडल में पहली बार कैबिनेट मंत्री बने। कैबिनेट मंत्री रहते उन्होने अपनी मां को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया और जब 2007 में चुनाव हुये तो सपा की सरकार तो नहीं बनी मगर वे दूसरी बार विधायक बनने में कामयाब हुए। बसपा के शासन काल में राजकिशोर सिंह के भाई डिंपल जेल गये फिर उनके उपर गैंगस्टर एक्ट भी लगा।



इसके बाद 2012 में जब सपा की सरकार आई तो विधायक बनते ही राजकिशोर सिंह सबसे कद्दावर मंत्री के रूप में उभरे। राजकिशोर सिंह लगातार 2003 में उद्यान मंत्री, 2007 में भी उद्यान विभाग के मिनिस्टर बने और 2012 में भी कुछ दिन उद्यान मंत्री रहने के बाद सीएम ने उन्हे पंचायतीराज, लघु सिंचाई और पशु पालन जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे। इतना ही नहीं पूरे जिले में राजकिशोर के नाम का सिक्का चलता रहा है और डीएम, एसपी से लेकर थानेदार तक की पोस्टिंग व ट्रांसफर में उनकी दखलअंदाजी रहती थी।


राजकिशोर ने सत्ता के बल पर अपने बेटे को जिला पंचायत का अध्यक्ष और भाई को उर्जा विभाग का सलाहकार बनवाने में प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े समाजवादी परिवार कहलाने लगे। मंत्री की बर्खास्तगी की खबर के बाद कुछ लोग बेहद नाराज है और दुखी हैं तो कुछ इस कार्यवाही से खुश हैं।
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