
ससुराल
बस्ती. प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान ने अब सचमुच गांव-गांव जागृति पैदा कर दी है। कुछ समय पूर्व तक हर परेशानी झेलने के बावजूद ससुराल में उफ तक न करने वाली बहुएं अब मुखर होने लगी हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है कि बहुएं अपनी समस्याओं को लेकर न सिर्फ आवाज उठा रही हैं, बल्कि उनके समाधान का संकल्प भी ले रही हैं। ऐसी ही एक ताजा खबर बस्ती की है। जहां एक परिवार की बहू ससुराल में शौचालय न होने पर मायके आ गई। वह इस बात का संकल्प लेकर बैठी है कि जब तक ससुराल में शौचालय नहीं बन जाएगा तब तक वह पति के घर नहीं जाएगी।
बतादें कि संतकबीर नगर जनपद के पौली ब्लॉक के पैंतवलिया कलां गांव निवासी रामसुभग की बेटी सुमन की शादी कुदरहा ब्लाक के ग्राम पंचायत हरखौलिया उर्फ मटियरिया में 21 मई 17 को रामलौट के पुत्र भालचंद के साथ हुई थी। सुमन ने बताया कि जब वह ससुराल पहुंचीं तो पता चला कि घर में शौचालय नहीं है। पति से उन्होंने इस बारे में कहा तो पति ने कहा कि अभी हाथ तंग है कुछ पैसा होने दो तो बनवा दूंगा। ससुर ने भी ग्राम प्रधान से शौचालय बनवाने के लिए कहा तो उन्होंने ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। ससुराल में पहली बार अनुभव हुआ कि शौचालय के अभाव में किसी महिला की जिंदगी कितनी कठिन होती है। सुबह मुंह अंधेरे में तथा शाम को अंधेरा होने के बाद घर से निकलना कितना मुश्किल है यह वहीं समझ सकता है जो इस जिंदगी को भोग रहा है।
सुमन ने बताया कि मायके में उनके यहां उनके पिता तथा ताऊ का शौचालय पास-पास बना है। जब जरूरत होती है परिवार के सदस्य इस्तेमाल करते हैं। ससुराल में काफी प्रयास के बाद भी जब शौचालय बनने की व्यवस्था नहीं हो पाई तो वह 19 वें दिन मायके चली आईं। यह तय कर लिया कि तब तक शौचालय नहीं बनेगा तब तक ससुराल नहीं जाएंगी। हालांकि ससुराल से कई बार संदेशा आया कि शौचालय बनवा देंगे, आ जाओ पर वहां भोगी हुई परेशानी याद कर हिम्मत नहीं हो रही है। सुमन के ससुर रामलौट ने कहा कि घर में शौचालय बनवाने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी से भी इस संबंध में काफी अनुनय-विनय की लेकिन उन लोगों ने शौचालय बनवाने के नाम पर न तो हां कहा और न ही ना।
बताया कि लड़का भालचंद्र बाहर कमाने गया है, लौट कर आएगा तो सबसे पहला काम यही करना है कि बहू की सुविधा के लिए शौचालय का निर्माण कराना है। पंचायत सेक्रेटरी विवेक कुमार ने कहा कि शौचालय निर्माण के लिए शीघ्र ही रामलौट का चेक बना कर दे दिया जाएगा। सुमन ने किया हिम्मत का काम, बनेंगी ब्रांड एंबेसडर : डीपीआरओ डीपीआरओ गोपाल जी ओझा ने कहा कि इस प्रकरण की जानकारी उन्हें नहीं है। यदि रामलौट की बहू सुमन इस वजह से ससुराल नहीं आ रही है कि उसके घर में शौचालय नहीं है तो उसने बस्ती के लोगों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। ऐसे लोग जनपद ही नहीं देश में उदाहरण हैं। इनका शौचालय शीघ्र बनेगा तथा सुमन को ऐसी हिम्मत दिखाने के लिए सम्मानित किया जाएगा। पंचायती राज विभाग उसे अपना ब्रांड एंबेसडर बनाएगा।
Published on:
30 Nov 2017 10:21 am

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