
Beauty Tips in Hindi: आयुर्वेद में शरीर की मालिश का महत्त्व है। खासकर जब यह मालिश किसी तेल से की जाए। आयुर्वेद में मालिश को अभ्यंग कहते हैं। यह शरीर की सामान्य व रोगग्रसित अवस्था दोनों में काफी उपयोगी है। शरीर के विभिन्न अंगों की मालिश को अलग-अलग नाम दिया गया है। जैसे सिर की मालिश को शिरोभ्यंग, तलवों की मालिश को पदअभ्यंग और शरीर की मालिश को सर्वांग अभ्यंग कहते हैं।
तेल मालिश करना एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है मालिश से हमारे पूरे शरीर में खून का दौरा बढ़ जाता है और पाचन शक्ति तेज हो जाती है, पेट साफ रहता है तथा आंते, दिल, फेफड़े और यकृत आदि शक्तिवान हो जाते है। बहुत से पुराने रोग जैसे कि अपच, वायु पित्त विकार, बवासीर, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप आदि रोगों में मालिश से काफी फायदा होता है। जो व्यक्ति शारीरिक रुप से दुर्बल है और वजन स्वाभाविक रुप से कम है, उनको तेल मालिश करने से बहुत लाभ होता है। उनका शरीर जल्दी-जल्दी तेल सोखने मेँ सक्षम होता है। थोड़े ही दिनोँ के बाद ऐसे लोगोँ का वजन बढऩे लगता है। मालिश करने से शरीर त्वचा के सभी बंद रोम क्षिद्र खुलने लगतें है। इसके साथ ही त्वचा में रक्त का संचार सुचारू रूप से होने लगता है। जानेें मालिश के दौरान, पहले व बाद में क्या ध्यान रखें।
ये अपनाएं
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार स्नान से पहले शरीर पर मालिश करने से त्वचा के रोमछिद्र सक्रिय होते हैं। लेकिन मालिश के तुरंत बाद भी नहीं नहाना चाहिए। कम से कम 10-15 मिनट का गैप देना चाहिए। ऐसे में रोग और मौसम के अनुसार सरसों, नारियल, जैतून व बादाम के तेलों को प्रयोग में लिया जाता है। सर्दी के दिनों में सरसों और नारियल के तेल से रोजाना मालिश करने से रक्तसंचार बेहतर होता है। साथ ही हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
Read More: रोजाना 2 चम्मच अलसी का सेवन सेहत के लिए है बेहद फायदेमंद
सुबह के समय 8-11 बजे के बीच की धूप में बैठकर मालिश करने से काफी फायदा होता है। इस दौरान धूप की किरणों से विटामिन-डी मिलता है और मालिश से शरीर इस विटामिन को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। शिरोभ्यंग से तनाव दूर होता है। साथ ही सिर, कंधे व गर्दन के दर्द में राहत मिलने के साथ नींद अच्छी आती है। पदाभ्यंग करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और पैरों को मजबूती मिलती है।
Published on:
26 Aug 2021 12:36 am
बड़ी खबरें
View Allब्यूटी टिप्स
लाइफस्टाइल
ट्रेंडिंग
स्वास्थ्य
