
बेमेतरा. तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला मुख्यालय में संचालित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) को आज भी पुराने ढर्रे पर चलाया जा रहा है। सन् 1999 से शुरू हुए संस्थान में बीते 17 सालों में एक भी नया ट्रेड जोड़ा गया है, जबकि इसके बाद शुरू हुए संस्थानों में समय के हिसाब से माकूल रोजगारपरक ट्रेड संचालित हो रहे हैं।
मात्र कोपा, इलेक्ट्रिशियन व डीजल मैकेनिक ट्रेड में मिल रहा ट्रेनिंग
जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय में 11 नवबर 1998 को बेमेतरा में कोपा और इलेक्ट्रिशियन ट्रेड के साथ मिनी आइटीआइ प्रांरभ किया गया था। स्थापना के तीन साल बाद डीजल मैकेनिक का ट्रेड शुरू किया गया, जिसके बाद से आज तक कोई नया रोजगारमूलक ट्रेड शुरू नहीं किया जा सका है। आसपास में स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान नहीं होने के कारण यहां के तीनों कोर्स में प्रशिक्षण लेने के लिए बच्चों में जोर-आजमाइश रहती है, लेकिन ट्रेड पूरा करने के बाद कितनों को रोजगार मिल पाया है, इस पर बड़ा सवाल है।
पुराना संस्थान फिर भी दूसरे जिलों से पिछड़ा
गौरतलब हो कि प्रदेश के दीगर जिलों में संचालित किए जा रहे शासकीय आइटीआइ में समय की मांग के अनुसार, हास्पिटल हाउस कीपिंग, वेल्डर, कटिंग-टेलरिंग, रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडिशनिंग, मेशन जैसे नए ट्रेड संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन दशकों पहले शुरू हुए बेमेतरा आइटीआइ में आज भी पुराने ट्रेड पर ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कोर्स के बाद प्रशिक्षुओं के नौकरी के लिए भटकने की स्थिति को देखते हुए नए और डिमांड वाले ट्रेड शुरू किए जाने की मांग सालों से की जा रही है।
भवन बना पर उपयेाग नहीं कर पाए
बताना होगा कि शासन द्वारा आइटीआइ संचालन के लिए 7 एकड़ से अधिक जमीन नेशनल हाइवे के किनारे दी गई है, जिसमें अब तक दो भवन ही बने हैं। दोनों भवनों में से केवल एक में कोर्स संचालित किया जा रहा है, वहीं 65 लाख खर्च बनाए गए दूसरे भवन में कोर्स शुरू करने की तैयारी की जा रही थी कि जिला गठन के बाद अस्थाई जिला कार्यालय बना दिया गया। जिला कार्यालय को 18 अगस्त 17 में नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी उस भवन में आज तक कोर्स शुरू नहीं किया गया है, उलटे भवन में ताला जड़ दिया गया है।
शासन ने दिए करोड़ों पर पोताई तक नहीं की
आइटीआइ संचालित करने वाली औद्योगिकी प्रबंधन समिति को शासन से बिना ब्याज के करोड़ों रुपए मुहैया कराया गया है, लेकिन इसके बाद भी केंद्र के कमरों के वर्षों से टूटे हुए कांच को न तो बदला गया है, और न ही भवन का रंग-रोगन किया गया है। यह बदहाली केवल केंद्र के प्रत्येक हिस्से में नजर आती है, जिसके लिए फंड का उपयोग किया जा सकता था।
नए ट्रेड को लाने का कर रहे प्रयास
आइटीआइ अधीक्षक एआर राम ने बताया कि वे संस्थान में नए ट्रेड लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए संचानालय रोजगार एवं प्रशिक्षण को प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है, जिसमें मार्केटिंग एक्जिक्यूटिव, हास्पिटल हाउस कीपिंग, कटिंग व टेलरिंग के अलावा संचालित कोर्स को उन्नयन किया जाना शामिल है। अनुमति मिलने के साथ ही प्रशिक्षण देने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जानकारों का कहना है कि यह प्रयास सालों पहले किया जाता तो आज स्थिति दूसरी होती। इस संबंध में आइटीआइ अधीक्षक एआर राम ने कहा कि संस्थान में नए ट्रेड के लिए प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजा गया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही ट्रेड शुरू किया जाएगा।
Published on:
08 May 2018 07:30 am

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