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CM साहब, ये ऐसी योजना है जिसमें न रोजगार की गारंटी है और न ही भुगतान की, आप ही बताओ क्या करें ?

सालभर से मनरेगा की मजदूरी के लिए लगा रहे चक्कर, खंडसरा के 150 मजदूरों ने धनगांव में किया था काम, जिले से जारी है ग्रामीणों का पलायन

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Bemetara Breaking news, MNREGA In Bemetara

नवागढ़ .रोजगार गारंटी योजना मनरेगा की वास्तविक स्थिति यह है कि न रोजगार की गारंटी है न भुगतान की। नतीजा यह कि पलायन पर मजदूरों को भरोसा है, नाकामी छिपाने जनपद व जिला पंचायत पलायन का रिकॉर्ड नहीं रखते। मजदूरों की मजबूरी को परंपरागत पलायन बताकर दायित्व से मुक्ति पा लेते हैं।

साढ़े 7 लाख रुपए का भुगतान लंबित
बेमेतरा जिले में शौचालय निर्माण में पीठ थपथपवाने में गणित में श्रम मूलक रोजगार मलक कार्यों को नजरअंदाज किया गया। कहीं कार्य किया भी गया तो भुगतान अटक गया। मजदूर भटक रहे हैं, पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। बेमेतरा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत धनगांव में नर्सरी से लावातरा पहुंच मार्ग के लिए ग्राम पंचायत खंडसरा के लगभग 150 मजदूर तीन से चार किमी दूरी तय कर सालभर पहले काम करने आए।

तपती दोपहरी में गड्ढा खोदकर चलने लायक सड़क बनाए, गांव छोड़कर इस कारण आए कि हाथ को काम मिलेगा, काम के समय पर भुगतान पर तस्वीर ठीक विपरीत है। इन मजदूरों का लगभग साढ़े 7 लाख का भुगतान लंबित है। मजदूर सरपंच व पंचायत का चक्कर लगा रहे हैं।

मनरेगा में काम लिया पर दाम नहीं दिया
खंडसरा के मजदूर लक्ष्मण, मनराखन, अशोक, गायत्री, ओंकार, आरिफ, गुलापा, संतोष, पूर्णिमा, रजनी, नेमचंद, उषा, कमलेश, देवेंद्र ने कहा कि ग्राम सुराज तो निपट गया अब हम मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विकास यात्रा का इंतजार कर रहे हैं। हम तगाड़ी व कुल्हाड़ी, गैंती, रापा लेकर विकासयात्रा का स्वागत करेंगे।

जिससे पूरे राज्य के लोगों को पता चले कि काम लिया गया पर दाम नहीं दिया गया। ग्राम पंचायत में पूरी जानकारी नहीं दी जाती। खंडसरा के मजदूरों ने कहा कि 150 लोग गांव छोड़कर गए थे कि वक्त में हमें भुगतान मिल जाएगा पर मिला नहीं, पलायन ही ठीक है, जहां हर सप्ताह भुगतान की गारंटी है।

तीन साल से इंतजार
ग्राम धनगांव के मजदूर तिजऊराम ध्रुव, कुंभलाल, रुपेश, अशोक, भगवानी साहू, नकुल साहू, विजय साहू, रम्मन, रामचरण, श्रीराम सीता, रूपदास, कौशल, भाईराम, पकलु, निलेश, विमला, रधिया सहित कई मजदूर रोड, तालाब, नर्सरी में मनरेगा के तहत काम किए। दो से तीन वर्ष हो गए पर मजदूरी नहीं मिला।

लगातार पड़ रहे सूखे से टूट चुके हैं किसान और मजदूर
कांग्रेसी नेता गुरुदयाल बंजारे ने कहा कि मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री का टीआरपी बढ़ाने शौचालय निर्माण में समूचा प्रशासन लगा रहा। इससे केवल रेत, सीमेंट, दरवाजा, ईंट बनाने वाले तथा एक गांव में तीन से पांच लोगों को रोजगार मिला।

गत तीन वर्षों का यदि आंकड़ा निकाले तो पता चल जाएगा कि हाथों को कम काम मिला। बंजारे ने कहा कि लगातार तीन अकाल से टूट चुके किसान गांव छोडऩे मजबूर हैं। नवागढ़ से प्रतिदिन 15 परिवार का पलायन हो रहा है, जो चिंताजनक है। 2019 के चुनाव के पूर्व शौचालय के लिए मरम्मत फंड जारी करना सरकार की मजबूरी होगी। 40 प्रतिशत शौचालय उपयोग के लायक नहीं हैं।

लापरवाही के लिए अधिकारी हैं जिम्मेदार
सहकारिता मंत्री व नवागढ़ विधायक डीडी बघेल ने इस संबंध में कहा कि मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों में मजदूरी भुगतान की शिकायत बेमेतरा जनपद में अधिक है। पीओ रोजगार सहायक सामग्री भुगतान में जितनी रुचि लेते हैं, यदि उतनी रुचि मजदूरी भुगतान लें तो शिकायत नहीं आएगी। इस तरह की लापरवाही के लिए पूरी तरह से अधिकारी ही जिम्मेदार हैं। जनपद पंचायत बेमेतरा के सीईओ दीपक ठाकुर ने कहा कि मजदूरी भुगतान लंबित क्यों है, कितने मजदूरों का भुगतान बाकी है, इसके जांच के लिए टीम धनगांव जाएगी।