
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खंडसरा ( Photo- Patrika )
Patrika Expose: बेमेतरा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खंडसरा के भवन और तामझाम को दूर से देखकर लगता है कि यह राज्य का सबसे बेहतर अस्पताल है पर नजदीक से निहारने पर दिखता है कि सबसे बदतर अस्पताल है। बुधवार को सुबह 9 बजे जब पत्रिका की टीम अस्पताल पहुंची तो ओपीडी काउंटर के पास एक गाय खड़ी थी। सामने लिखा था ओपीडी सुबह 9 से शाम 4 बजे तक।
ओपीडी काउंटर में तो कोई नहीं था, जब अस्पताल के भीतर गए तो कुल तीन कर्मचारी थे। बाकी कमरे सूने थे। न कोई डॉक्टर न कोई मरीज। मुख्य द्वार पर रेडक्रॉस से मिली एक एबुलेंस खड़ी दिखी, जो महीनों से हिली-डुली तक नहीं है। बिना हवा के टायर सब कुछ बताते दिखे। अस्पताल परिसर में लगे सूचना बोर्ड को देखकर लगता है कि इतनी सुविधा वाले अस्पताल में सन्नाटा क्यों है। बोर्ड को पढ़ने से ही कई बीमारी गायब हो जाती है।
आयुष्मान पंजीयन, औषधि वितरण, चिकित्सक कक्ष, दंत चिकित्सक, गर्भवती जांच एवं परामर्श, प्रसव के बाद देखभाल, प्रसव के पूर्व देखभाल, नर्सिंग स्टाफ कक्ष, नेत्र चिकित्सक, चिकित्सक ड्यूटी कक्ष, नवजात देखभाल इकाई, आपात कालीन चिकित्सा, ड्रेसिंग माइनर ओटी, इंजेक्शन कक्ष, पैथोलॉजी जांच, संग्रहण, एक्स-रे, टेक्नीशियन कक्ष, सीएचसी भंडार, विद्युत कंट्रोल पैनल सहित कुल 26 कमरे बोर्ड पर कार्यशील हैं। इतनी सुविधा वाले अस्पताल में यदि आधे का भी लाभ मिले तो क्षेत्र धन्य हो जाए।
समाज सेवक मनोज सोनी ने कहा कि खंडसरा अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए सोनोग्राफी सुविधा जरूरी है। 25 गांव के लोगों को चिकित्सा सुविधा के लिए बेमेतरा जाना पड़ता है। खंडसरा अस्पताल से मरीजों का भरोसा उठ गया है। इसी कारण 9 बजे न मरीज आते न डॉक्टर। खंडसरा अस्पताल केवल देखने के लिए है, उपयोगी नहीं।
अस्पताल के बाहर एक कमरे में कार्टून में भरकर बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाई रखी गई है। सरकारी सप्लाई की दवाओं को किसके लिए सुरक्षित रखा गया है, विभाग जानें पर दवाई देखकर लगता है कि मरीज केवल कागजों में आते हैं। बीस साल पहले जब आसपास के गांव से लोग पगडंडी से खंडसरा अस्पताल आते थे तो उन्हें भरपूर चिकित्सा सुविधा मिलती थी। आज साधन सड़क तो मिल गई पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी तो पूरे प्रदेश में है।
बेमेतरा कलेक्टर रणवीर शर्मा ने कहा कि खंडसरा अस्पताल की जानकारी लेता हूं। क्यों ओपीडी समय पर शुरू नहीं होती।
Updated on:
22 May 2025 02:21 pm
Published on:
22 May 2025 02:21 pm
