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दवा उद्योग में आत्मनिर्भरता और अधिकारों की लड़ाई का मंच बनेगा बैतूल

175 elected representatives from 22 units across Madhya Pradesh will participate in the conference.

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बैतूल। मध्यप्रदेश मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन का दो दिवसीय 42वां राज्य सम्मेलन आज 10 जनवरी से बैतूल शहर के वृंदावन गार्डन में शुरू होने जा रहा है। इस संबंध में शुक्रवार 9 जनवरी को होटल श्री कृष्ण में यूनियन द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान सम्मेलन के उद्देश्य, कार्यक्रम और दवा प्रतिनिधियों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों की जानकारी दी गई।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह तोमर ने देश में नकली दवाओं के बढ़ते खतरे, दवा उद्योग से जुड़े ज्वलंत मुद्दों और इस पर सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन पूरे प्रदेश में कार्यरत दवा एवं सेल्स प्रतिनिधियों की समस्याओं को सुलझाने और उनकी मांगों को प्रमुखता से उठाने वाला जुझारू संगठन बन चुका है। बैठक में प्रदेश महासचिव अनुराग सक्सेना, जॉइंट जनरल सेक्रेटरी आशीष जैन भी मौजूद रहे।  

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि पिछले दो वर्षों में यूनियन ने आम जनता से जुड़े मुद्दों जैसे दवाओं की कीमत, चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी, उच्च गुणवत्ता की दवाओं की उपलब्धता और ऑनलाइन दवा मार्केटिंग पर रोक की मांग लगातार उठाई है। इसका परिणाम यह रहा कि हाल ही में केंद्र सरकार ने कई दवाओं पर लगने वाली 65 प्रतिशत जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत किया है।

पत्रकार वार्ता में छिंदवाड़ा में कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत को नकली दवा माफिया और व्यवस्था की लापरवाही का नतीजा बताते हुए सरकार, ड्रग कंट्रोलर और दवा निर्माता कंपनी को दोषी ठहराया गया।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी दी की सम्मेलन में पूरे मध्यप्रदेश की 22 इकाइयों से 175 चुने हुए प्रतिनिधि भाग लेंगे। महासचिव द्वारा यूनियन के दो वर्षों के कार्यों की रिपोर्ट और कोषाध्यक्ष द्वारा आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा। आगामी रणनीति पर भी चर्चा होगी। अंत में आभार जिला अध्यक्ष पंकज साहू ने व्यक्त किया।

- इन मुद्दों पर होगा राज्य स्तरीय सम्मेलन

सम्मेलन में चारों श्रम संहिताओं को रद्द कर एसपीई एक्ट 1976 को बहाल रखने, दवा प्रतिनिधियों के लिए वैधानिक कार्य नियमावली बनाने, सरकारी अस्पतालों में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध हटाने, दवाओं की कीमतें कम करने, जीएसटी हटाने, नकली दवा निर्माताओं को सख्त सजा, न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये, न्यूनतम वेतन 26910 रुपये, आठ घंटे कार्य प्रणाली लागू करने और निजता के अधिकार की रक्षा जैसी मांगों पर चर्चा होगी।