
बैतूल। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद प्रदेश सरकार और नगर पालिकाएं पेयजल की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट मोड पर हैं। बैतूल नगर पालिका द्वारा फिल्टर प्लांट में प्रतिदिन पानी की जांच कर शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। नगर पालिका के अनुसार शहर के अलग-अलग वार्डों से प्रतिदिन पानी के सैंपल एकत्र कर जांच के लिए जल प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी समय रहते सामने आ सके। नगर पालिका द्वारा प्रतिदिन वार्डों से पांच-पांच सैंपल लेकर कुल 15 सैंपल की जांच कराई जा रही है। फिल्टर प्लांट स्थित नगर पालिका की प्रयोगशाला में प्रत्येक वार्ड में सप्लाई किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता को परखा जा रहा है। जांच के दौरान पानी की पीएच वैल्यू, हार्डनेस, क्लोरीन की मात्रा सहित अन्य जरूरी मानकों की नियमित जांच की जा रही है। नगर पालिका का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की जल आपूर्ति की जा रही है।
पेयजल गुणवत्ता पर नजर रखने के साथ-साथ नगर पालिका द्वारा शिकायत निवारण की भी व्यवस्था की जा रही है। जिला मुख्यालय पर आयोजित जल सुनवाई में इस बार कोई भी शिकायत दर्ज नहीं हुई, लेकिन अब नगर पालिका ने वार्ड स्तर पर शिविर लगाने का निर्णय लिया है। गुरुवार से शुरू होने वाले इन शिविरों में नागरिक पेयजल से जुड़ी किसी भी समस्या को सीधे अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। नगर पालिका ने शिविरों के लिए चार-चार सुपरवाइजरों की ड्यूटी लगाई है, जो वार्डों में जाकर लोगों से संपर्क करेंगे। शिविरों में शिकायतों की सुनवाई के साथ ही मौके पर निराकरण के प्रयास किए जाएंगे। नगर पालिका के जल शाखा प्रभारी सब इंजीनियर धीरेंद्र राठौर ने बताया कि फिल्टर प्लांट में प्रतिदिन जांच कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि शहर में सप्लाई होने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हो। साथ ही वार्डों में शिविरों के माध्यम से नागरिकों से संवाद कर पेयजल से जुड़ी हर समस्या का समाधान किया जाएगा।
Published on:
13 Jan 2026 09:18 pm
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