
High tension stress on lead-homes
बैतूल। शहर का दायरा बढ़ा तो खतरा भी बढ़ गया है। हाईटेंशन लाइन के नीचे लोगों ने बिना अनुमति के घर तो बना लिए, लेकिन अब हाईटेंशन का खतरा उनके ऊपर मंडराने लगा है। हाईटेंशन लाइनों से होने वाली दुर्घटनाओं के चलते लोगों में हाईटेंशन को लेकर टेंशन बढऩे लगा है। लोगों की माने तो हाईटेंशन लाइनों को हटाने के लिए उन्होंने कई बार आवेदन किए लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं विद्युत कंपनी का तर्क है कि हाईटेंशन लाइनें तो कई सालों से अपनी जगह ही मौजूद हैं उल्टे लोगों ने वहां मकान बना लिए हैं। अब लाइनें तो हटाई नहीं जा सकती है। ऐसे में लोगों को अब खतरे के नीचे रहने का आदत डालना होगी लेकिन सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है।
निर्माण अवैध है तो कार्रवाई नहीं की
नगरपालिका का कहना है कि हाईटेंशन लाइन के नीचे मकान बनाने की अनुमति नहीं दी जाती है, लेकिन इसके बाद भी लोगों ने बिना परमिशन के यदि मकान बना लिए हैं तो वह अवैध है, लेकिन इस मामले में नगरपालिका ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। यदि अवैध तरीके से भवन निर्माण किया गया तो नगरपालिका को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाना चाहिए थी लेकिन ऐसे किसी मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। यही कारण है कि बना अनुमति के ही लोग भवन निर्माण कर रहे हैं।
हाईटेंशन के नीचे रहने को मजबूर
शहर की करीब २० फीसदी आबादी हाईटेंशन लाइनों के नीचे रहने को मजबूर है। लाइनें तो काफी पुरानी बिछी है, लेकिन लोगों ही उसके नीचे आकर बस गए हैं। चूंकि पहले घर लाइनों के काफी नीचे हुआ करते थे तो खतरा इतना नहीं था, लेकिन अब लोगों ने बिल्डिंगे तानना शुरू कर दिया है जिससे हाईटेंशन लाइन और घर के बीच का फासला कम हो गया है। जो अब घर में रहने वाले लोगों के लिए ही खतरा बन गया है। ज्यादातर वार्डों में स्थिति यह है कि हाईटेंशन लाइन लोगों के घरों को छूकर गुजर रही है। ऐसे में किसी भी हादसे से इंकार नहंीं किया जा सकता है। शहर के प्रताप वार्ड और चंद्रशेखर वार्ड में हाईटेंशन लाइनों का खतरा देखा जा सकता है। घरों से ऊपर गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनों के कारण कुछ लोगों ने तो छतों पर जाना तक बंद कर दिया है।
मकान बनाने की अनुमति पर उठाए सवाल
विद्युत वितरण कंपनी की माने तो नियमानुसार हाईटेंशन लाइनों के नीचे मकान बनाए जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, लेकिन नगरपालिका बगैर सोचे-समझे लोगों को आवास बनाने के लिए अनुमति जारी कर दी जाती है। लोग भी अनुमति मकान बनाने के लिए लेते हैं, लेकिन बिल्डिंगे तान देते हैं। जो हादसे का बड़ी वजह होती है। देखा जाए तो नगरपालिका को मकान निर्माण की अनुमति देने से पहले स्थल निरीक्षण करना चाहिए ताकि सही स्थिति का पता चल सके। कंपनी का तर्क यह भी था कि लाइनों के स्थानांतरण में काफी मेन पॉवर और राशि की जरूरत पड़ती है लोगों के कहने भर से इसे एकदम से हटाया या बदला नहीं जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग स्वयं अपना बचाव करना सीखे।
अब तक २०० नोटिस जारी कर चुके
विद्युत वितरण कंपनी का कहना था कि नगरपालिका बगैर मौका निरीक्षण किए हाईटेंशन लाइनों के नीचे लोगों को मकान बनाने की अनुमति दे रही है, या फिर लोग बिना अनुमति लिए ही मकान बना रहे हैं। इस साल हमनें धारा ५६ के तहत २०० से अधिक लोगों को नोटिस भी जारी किए हैं लेकिन आज तक इन नोटिसों का कोई जवाब नहीं मिला है। टाउन कार्यालय के मुताबिक अभी तक २०० से अधिक नोटिस हाईटेंशन लाइनों के नीचे मकान बनाने वालों को जारी किए चुके हैं। इनमें कोठीबाजार, लिंक रोड, मुर्गी चौक पर कई मकान हाईटेंशन लाइनों के नीचे बने हैं।
इनका कहना
- विद्युत अधिनियम की धारा ५६ के तहत हाईटेंशन लाइन के नीचे भवन निर्माण करने वालों को नोटिस जारी करते हैं। हमारी लाइनें तो सालों पुरानी है, लेकिन लोगों ने बिल्डिंगे अभी बना ली है, इसमें हमारी कोई गलती नहीं।
-हाकम सिंह बाथम, सहायक यंत्री टाउन वन विद्युत वितरण कंपनी बैतूल।
- जिन कॉलोनियों में हाईटेंशन लाइन गुजरती है वहां हाईटेंशन लाइन के नीचे मकान बनाने की अनुमति नगरपालिका जारी नहीं करती है। यदि कोई हाईटेंशन के नीचे मकान बनाता है तो वह अवैध है।
- अक्षत बुंदेला, सीएमओ नगरपालिका बैतूल।
Published on:
20 Dec 2022 09:29 pm
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