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सतपुड़ा डैम में मुंबई की कंपनी पता लगाएगी कितना स्टोर हो रहा है पानी

- तवानदी पर निर्मित सतपुड़ा डैम है जिले का सबसे बड़ा जलाशय- बीते साल पूरे सीजन में 892 मिलीमीटर बारिश दर्ज की थी तो इस साल अब तक हो चुकी है 1274 मिलीमीटर बारिश

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satpuda dam sarni

satpuda dam sarni

सारनी. बारिश खत्म होने के बाद तवा नदी पर निर्मित सतपुड़ा डैम का सर्वे होगा। इसके लिए मुंबई की कंपनी को टेंडर भी हो गया है। बीते सप्ताह सर्वे कंपनी ने जलाशय का निरीक्षण किया है। लगातार हो रही बारिश की वजह से सर्वे कंपनी ने जलाशय के क्षेत्रफल का निरीक्षण कर वापस लौट गई। निर्माण के समय जलाशय में पानी की क्षमता 110 एमसीएम यानी की मीलियन क्यूबिक मीटर थी जो वर्ष 2008 के सर्वे में घटकर 75 एमसीएम पर आ पहुंची थी। पुन: सर्वे करने मुंबई की कंपनी को टेंडर हुआ है। डैम लबालब होने पर सर्वे कर पता लगाया जाएगा कि जलाशय में कितना पानी स्टोर है। बीते 11 वर्षों में जलाशय की क्षमता घटकर 55 से 60 एमसीएम के करीब आने का अनुमान है। गौरतलब है कि प्राकृतिक नदियों का पानी सीधे सतपुड़ा जलाशय में पहुंचता है। पानी के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी, रेत और राख जलाशय में पहुंचती है। जिससे क्षमता में कमी आना स्वाभाविक है।
दो करोड़ 43 लाख में बना था सतपुड़ा डैम
जानकारी अनुसार 2975 एकड़ क्षेत्रफल में फैले जलाशय की क्षमता 1433 फीट है। निर्माण के समय जलाशय में पानी की क्षमता 110 एमसीएम थी। तवा नदी पर निर्मित सतपुड़ा डैम जिले का सबसे बड़ा जलाशय है। हालांकि इस जलाशय का पानी सिंचाई के लिए नहीं दिया जाता। इस जलाशय के पानी का उपयोग बिजली निर्माण और शहरी क्षेत्र की जलापूर्ति के लिए होता है। वर्ष 1964 से 1967 के बीच तीन साल में तवा नदी पर 1685 फीट लंबा बांध बनाया। जिसका नाम सतपुड़ा रखा गया। इस समय जलाशय निर्माण में मप्र राज्य विद्युत मंडल ने 2 करोड़ 43 लाख रुपए व्यय किए थे। सतपुड़ा जलाशय की खासबात यह है कि 685 फीट मिट्टी से बना है। जबकि एक हजार फीट सीमेंट-कांक्रीट से निर्माण किया गया है। सतपुड़ा जलाशय के 14 गेटों से अधिकतम एक लाख 70 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा सकता है। वर्षों बाद 26 अगस्त को जलाशय के 14 गेटों को खोलकर एक लाख 56 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकंड तवा नदी में करीब चार घंटे तक छोड़ा गया।
इसी सप्ताह लबालब होगा जलाशय
सतपुड़ा जलाशय 7 सितंबर को लबालब हो जाएगा। निर्माण के समय से ही डैम का लेवल जुलाई से सितंबर माह के प्रथम सप्ताह तक मेंटेन किया जाता है। 7 सितंबर की रात 12 बजे लेवल 1433 फीट पर मेंटेन किया जाएगा।खासबात यह है कि इस वर्ष 3 जुलाई को गेटों की टेस्टिंग की गई थी। 25 जुलाई तक लेवल 1428 .05 फीट था। यह पहला साल है जब वर्षा के सीजन में डैम का लेवल करीब एक फीट तक घट गया था। इससे जलाशय प्रबंधन काफी चिंतित था। लेकिन 25 जुलाई की रात से लेवल बढऩा ऐसा प्रारंभ हुआ कि 27 जुलाई को 1.45 बजे 1430.35 फीट लेवल हो गया।जिसे मेंटेन करने तीन गेट खोले गए।जबकि बीते वर्ष 16 जुलाई को ही डैम के गेट खोल दिए गए थे। बीते साल पूरे सीजन में 8 92 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। जबकि इस साल 2 सितंबर तक 1274 एमएम बारिश दर्ज हो चुकी है।
रात में डैम से छोड़ा 15 हजार क्यूसेक पानी, सोमवार शाम को भी हुई जोरदार बारिश
र विवार रात 11:30 से 12:12 बजे के बीच एक घंटे के भीतर 24 मिलीमीटर लगभग एक इंच बरसात दर्ज की गई। इसी के साथ सारनी क्षेत्र में बारिश का आंकड़ा 1275 एमएम पर पहुंच गया है। सोमवार शाम करीब 4:30 बजे के बाद अचानक काले बादल घिर और रात की तरह तेज गरज के साथ जोरदार बारिश हुई। इधर सतपुड़ा डैम का लेवल बढऩे पर रात 1 से 2 बजे के बीच डैम के 5 गेट 3-3 फीट की ऊंचाई पर खोल कर प्रति सेकंड 15 हजार क्यूसेक पानी तवा नदी में छोड़ा गया। इससे पहले शाम 7 से 10 बजे तक एक गेट 3 फीट की ऊंचाई पर खुला रहा। रात 10 से 1 बजे तक 3 गेट 3-3 फीट खोले। डैम का लेवल बढऩे पर गेटों की संख्या 5 और ऊंचाई 3-3 फीट की गई। लेवल 1432.50 फीट मेंटेन होने पर रात 2 से सुबह 7 बजे तक एक गेट एक फीट की ऊंचाई पर खोले रखा गया। सुबह गेट बंद हो गए थे।