
मुलताई। खेड़ी रामोसी में सीमांकन के दौरान पुलिस व राजस्व टीम पर हुए हमले के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ अब विवाद का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। घटना के बाद मासोद चौकी प्रभारी उप निरीक्षक रणधीर सिंह राजपूत को लाइन अटैच कर रक्षित केंद्र बैतूल भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में उनके द्वारा स्थिति का सही आकलन न करने और पर्याप्त बल के बिना मौके पर पहुंचने को लापरवाही मानते हुए स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
इधर, पुलिस ने 22 नामजद सहित कुल 32 ग्रामीणों के खिलाफ जानलेवा हमला, शासकीय कार्य में बाधा और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। अधिकांश आरोपी घटना के बाद से फरार बताए जा रहे हैं। मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने जमीन को लेकर धोखाधड़ी के आरोप लगाए। आरोपी रामजी उइके और उनके परिवार का कहना है कि उनके पास कुल 37 एकड 70 डिसमिल जमीन है। उन्होंने एक हरिजन परिवार को बटाई के लिए जमीन दी थी, लेकिन उस परिवार ने कथित रूप से धोखाधड़ी कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। बाद में उक्त जमीन को संतोष नामक व्यक्ति को बेच दिया गया, जिसने आगे यह जमीन भास्कर मगरदे को विक्रय कर दी। आदिवासी पक्ष का कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है और पहले उनकी वास्तविक जमीन का सीमांकन कर उन्हें स्पष्ट रूप से नापकर दी जाए। उनका कहना है कि सही सीमांकन के बाद ही वे अपनी जमीन से कब्जा देंगे। गौरतलब है कि मंगलवार को सीमांकन के दौरान विवाद बढऩे पर पथराव और हमले की घटना हुई थी, जिसमें उप निरीक्षक सहित कई पुलिसकर्मी, कोटवार और राजस्व कर्मचारी घायल हुए थे। थाना प्रभारी नरेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि मामला संवेदनशील है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और भूमि विवाद के पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि स्थिति को शांतिपूर्वक सुलझाया जा सके।
Published on:
25 Mar 2026 09:22 pm
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