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माध्यमिक शाला शांतिपुर-2 को प्रदेश के दस और संभाग के स्कूलों में मिला पहला पुरस्कार

स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय में जिले के स्कूल ने फहराया परचम, इसके पूर्व में ग्राम लेंदागोंदी के स्कूल को यह पुरस्कार मिल चुका है।

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माध्यमिक शाला शांतिपुर-2 को प्रदेश के दस और संभाग के स्कूलों में मिला पहला पुरस्कार

माध्यमिक शाला शांतिपुर-2 को प्रदेश के दस और संभाग के स्कूलों में मिला पहला पुरस्कार

बैतूल. स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय के अंतर्गत बैतूल जिले के एक स्कूल ने राज्य स्तर पर परचम फहराया है। यह स्कूल घोड़ाडोंगरी के अंतर्गत आने वाला शासकीय माध्यमिक शाला 'शांतिपुर-2' है। स्कूल को वर्ष 2021-22 के लिए राज्य स्तरीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार प्राप्त हुआ। पुरस्कार अंतर्गत शाला को फाइव स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है। पुरस्कार प्राप्त करने वाला यह स्कूल प्रदेश के दस और संभाग के स्कूलों में पहला है। इसके पूर्व में ग्राम लेंदागोंदी के स्कूल को यह पुरस्कार मिल चुका है।

शिक्षक को किया सम्मानित
शांतिपुर- दो शाला के प्रधान पाठक संतोष जोठे ने बताया सत्र 2021-22 के लिए स्कूल को यह पुरस्कार मिला है। शिक्षक ने बताया ने भारत सरकार के माध्यम से स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय के अंतर्गत पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन मंगवाएं जाते हैं। इसके बाद भारत सरकार की एक टीम स्कूल पहुंचकर इसका भौतिक सत्यापन करती है। अगस्त माह में टीम ने स्कूल का निरीक्षण किया था। स्कूल की सभी व्यवस्थाएं देखी थी। इसके आधार पर पुरस्कार मिला है। स्कूल को फाइव रेटिंग मिली है। शाला को पुरस्कार मिलने पर शिक्षा विभाग ने प्रसन्नता जाहिर की है। गणतंंत्र दिवस पर स्कूल के शिक्षक को सम्मानित किया है

बच्चों को पढ़ाने छोड़ा निजी स्कूल
शांतिपुर-दो स्कूल की खास बात यह है कि लोगों ने निजी स्कूलों से अपने बच्चों को निकालकर यहां पर पढ़ाई के लिए भेजा है। ग्राम सातलदेही की एक दंपती ने किराए का मकान लेकर बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं। स्कूल में कम्प्यूटर लैब हैं। ऑडिटोरियम का निर्माण करवाया जा रहा है। इसके लिए गांव के ही गणेश यादव ने एक एकड़ जमीन दान की है। स्कूल में प्राइमरी और माध्यमिक स्कूल साथ में लगता है। स्कूल में 290 बच्चे और 11 शिक्षक है।

शिक्षकों ने अपने वेतन से रखा सफाई कर्मचारी
शिक्षक जोठे ने बताया कि शाला में सभी के प्रयास से स्वच्छता के सभी मापदंडों को पूरा करने का प्रयास किया जाता है। इसके अंतर्गत शाला परिसर को साफ स्वच्छ रखना, शौचालय की नियमित सफाई, जल निस्तारण की उचित व्यवस्था एवं बच्चों को स्वच्छ पेयजल दिया जाता है। इसके लिए शाला के सभी शिक्षकों ने अपने वेतन से एक कर्मचारी की नियुक्ति भी है।