
बैतूल. परीक्षा देकर लौट रहे बच्चों का भयंकर बारिश ने ऐसा इम्तिहान लिया कि जिसे ये बच्चे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। बरसात की वो काली रात इन बच्चों को पूरी जिंदगी याद रही। इम्तिहान केवल बच्चों का नहीं बल्कि उनके माता-पिताओं का भी था जो बच्चों के घर लौटने की आस लगाए दरवाजे पर टकटकी बिठाए हुए थे। मामला बैतूल का है जहां परीक्षा देकर लौट रहे सात छात्र-छात्राएं भारी बारिश में कुछ इस कदर फंसे की उन्हें पूरी रात एक खेत में बने मकान में गुजारनी पड़ी।
बारिश ने लिया बच्चों का इम्तिहान
बैतूल जिले के चिचौली के गवाझडप गांव के 7 बच्चे शुक्रवार को त्रैमासिक परीक्षा होने के कारण चूनाहजुरी के हायर सेकेंडरी स्कूल में परीक्षा देने गए थे। लेकिन भारी बारिश के कारण ये बच्चे अपने घर वापस नहीं लौट पाए। दरअसल जैसे ही बच्चे एक्जाम खत्म होने के बाद चूनाहजूरी से गवाझड़प के कच्चे रास्ते से घर लौट रहे थे तभी तेज बारिश के कारण रास्ते में पड़ने वाली भाजी नदी उफान में आ गई । जिसके कारण स्कूली छात्र-छात्राओं ने धज्जा धुर्वे के खेत में बने मकान में रूककर रात गुजारी। बच्चों के पास मोबाइल भी नहीं था और उस जगह पर नेटवर्क न होने के कारण वो किसी अन्य के फोन से भी परिजन को सूचना नहीं दे पाए।
परिजन की अटकी रही सांसें
एक्जाम देकर बच्चों के घर न लौटने पर गांव में उनके परिजन हैरान होते रहे। माता-पिता टकटकी लगाए दरवाजे की तरफ देखते रहे की बारिश के बीच से उनका बच्चा घर लौट आए लेकिन इंतजार में पूरी रात गुजर गई। बच्चों के घर न लौटने पर कुछ परिजन ने सोशल मीडिया पर उनके लापता होने की पोस्ट डाली जिसे देखकर प्रशासन हरकत में आया और अलग अलग टीम बनाकर छात्र-छात्राओं की तलाश शुरु की।
प्रशासन ने बच्चों को सुरक्षित पहुंचाया घर
शनिवार की सुबह एक तरफ प्रशासनिक अमला बच्चों को ढूंढ रहा था तो वहीं दूसरी तरफ स्कूल के प्राचार्य और ग्रामीण छात्रों को ढूंढने के लिए कच्चे रास्ते से गवाझड़प गए थे, यहां रास्ते में स्कूली छात्राएं धज्जा धुर्वे के मकान में सुरक्षित मिले। दूसरे दिन भी भाजी नदी में उफान होने के कारण स्कूली छात्र-छात्राओं को वापस चूनाहजूरी लाया गया। जिसके बाद पक्के रास्ते के जरिए उन्हें वाहन से उनके घर पहुंचाया गया। बताया गया है कि चूनाहजुरी से गवाझड़प की दूरी सात किलोमीटर है। यह रास्ता कच्चा होने के साथ-साथ इसमें नदी नाले भी है। पक्का मार्ग चूनाहजूरी से चूनाजोड़, बेला नांद्रा होकर गवाझड़प तक है। यह रास्ता 22 किमी लंबा है इसलिए स्कूली छात्राएं कच्चे रास्ते से होकर ही अपने स्कूल पहुंचते हैं।
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Published on:
16 Sept 2023 10:56 pm
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