
बैतूल। नगर पालिका द्वारा शहर के स्लम वार्डों में स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति के उद्देश्य से बनाए गए सार्वजनिक शौचालय आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। जिन शौचालयों पर लाखों रुपए खर्च किए गए, वे या तो ताले में कैद हैं या फिर गंदगी और जर्जर हालत के कारण अनुपयोगी हो चुके हैं। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर लोगों ने इन शौचालयों का उपयोग करना ही बंद कर दिया है। इससे नगर पालिका के ओडीएफ प्लस जैसे दावों की हकीकत सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वेक्षण के समय नगर पालिका अचानक सक्रिय हो जाती है। शौचालयों की मरम्मत, रंग-रोगन और सफाई कराई जाती है, फीडबैक मशीनें लगा दी जाती हैं, लेकिन सर्वेक्षण खत्म होते ही जिम्मेदारी भी खत्म हो जाती है। इसके बाद न तो नियमित सफाई होती है और न ही रखरखाव। नतीजतन शौचालय या तो बंद कर दिए जाते हैं या फिर बदबू और गंदगी के कारण लोग उनका उपयोग करने से कतराने लगते हैं।
गंज क्षेत्र के जवाहर वार्ड स्थित स्लम एरिया में बना सार्वजनिक शौचालय देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुका है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई उपयोगकर्ता शौच के बाद पानी नहीं डालते, जिससे गंदगी फैल जाती है। नियमित सफाई और पानी की व्यवस्था न होने के कारण कुछ लोगों ने शौचालय के गेट में ताले लगा दिए हैं और इसे निजी उपयोग तक सीमित कर दिया गया है। ओडीएफ प्लस सर्वेक्षण के दौरान मरम्मत और फीडबैक मशीन तो लगा दी गई, लेकिन सर्वे खत्म होते ही शौचालय की सुध लेना बंद कर दिया गया।
कोठीबाजार क्षेत्र के शिवाजी वार्ड में लोहा पुल के पास बना सार्वजनिक शौचालय भी बदहाली का शिकार है। अंदर गंदगी का अंबार है, जिससे साफ प्रतीत होता है कि महीनों, बल्कि सालों से सफाई नहीं हुई। बाहर लगी फीडबैक मशीनें खराब पड़ी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नियमित सफाई न होने के कारण लोगों ने इसका उपयोग बंद कर दिया, जिसके बाद यह शौचालय खंडहर में तब्दील हो गया। कुल मिलाकर, स्लम वार्डों में बने ये सार्वजनिक शौचालय नगर पालिका की लापरवाह कार्यप्रणाली और जवाबदेही की कमी को उजागर कर रहे हैं।
Updated on:
09 Jan 2026 08:59 pm
Published on:
09 Jan 2026 08:58 pm
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