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दो लाख के कर्ज में डूबे किसान ने खाया जहर

दो लाख के कर्ज में डूबे आठनेर के ग्राम चिखली के एक आदिवासी किसान ने शुक्रवार देर रात कीटनाशक पी लिया।

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eaten poison

Farmer eaten poison

बैतूल। दो लाख के कर्ज में डूबे आठनेर ब्लॉक के ग्राम चिखली के एक आदिवासी किसान ने शुक्रवार देर रात सोयाबीन में डालने वाला कीटनाशक पी लिया। रात में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किए जाने के बाद हालत में सुधार नहीं होने पर शनिवार सुबह परिजन किसान को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने किसान को मृत घोषित करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। किसान का परिवार गरीब होने के कारण शव को ले जाने के लिए भी परिजनों के पास पैसे उपलब्ध नहीं थे। विधायक द्वारा आर्थिक मदद दिए जाने के बाद परिजन शव लेकर गांव के लिए रवाना हुए।
दो लाख के कर्ज में डूबा था किसान
ग्राम चिखली के ५५ वर्षीय कृषक पंजू कुमरे दो लाख के कर्ज में डूबा हुआ था। पांच साल पहले उसके द्वारा मासोद की महाराष्ट्र बैंक से कर्ज लिया गया था। एक साल तक तो उसने कर्ज चुकाया लेकिन अतिवृष्टि के कारण फसल बर्बाद होने पर कर्ज नहीं चुका पाया। जिसके कारण ब्याज की राशि लगातार बढ़ रही थी। बैंक भी समय-समय पर तकाजा करने के लिए पहुंच जाती थी।मृतक पंजू की पत्नी सुशीला बाई ने बताया कि शुक्रवार रात को खाना खाने के बाद वह घर के अंदर सो रही थी। पंजू गांव में घूमने के लिए निकल गया था। काफी देर बाद वह घर लौटा तो उसके चिल्लाने की आवाज सुनाई देने पर मैं जाग उठी। पंजू ने बताया कि टेंशन के चलते उसने कीटनाशक पी लिया है। जिसके बाद परिजन उसे जिला अस्पताल इलाज के लिए लेकर आए।
आठ एकड़ बंजर जमीन से परिवार का गुजारा
पंजू के पास आठ एकड़ बंजर पुश्तैनी जमीन है। जिस पर वह सालों से खेती करता आ रहा था। सिंचाई के लिए कुआं, ट्यूबवैल जैसे साधन नहीं होने के कारण साल में सिर्फ एक ही फसल ले पाता था। जबकि साल के अन्य दिनों में परिवार मजदूरी किया करता था। बीते दो-तीन सालों प्राकृतिक आपदा के चलते फसलें खराब होने के कारण परिवार की माली हालत काफी खराब हो गई थी। पंजू के दो बच्चे भी है जिनमें १५ वर्षीय विनोद और १२ साल की विनिता है। दोनों स्कूल में पढ़ते हैं और घर के कामकाज में भी हाथ बटाटें है।
बर्बाद हो गई सोयाबीन की फसल
मृतक किसान के भाई रमेश कुमरे ने बताया कि इस साल पंजू ने एक बोरा सोयाबीन और एक बोरा मूंगफल्ली खेत में बोई थी, लेकिन सोयाबीन की फसल पीलामोजेक के कारण पूरी तरह से बर्बाद हो गई। वहीं मूंगफल्ली की फसल भी ठीक नहीं रही। जिसके कारण पंजू पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान चल रहा था। सिर पर कर्ज का बोझ और उस पर फसल बर्बादी के कारण पूरा परिवार दुखी था। इन हालातों में आगे खेती कैसे करेंगे। घर का गुजारा कैसे होगा और ऋण की राशि कैसे चुकेगी। इन्हीं सब परेशानियों के चलते पंजू ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने का फैसला कर लिया।