7 मई को भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत एक बड़ा हवाई हमला किया था, जिसने पाकिस्तान की वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचाया। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने पहली बार इस ऑपरेशन के दौरान हुई तबाही का खुलासा किया है। एयर चीफ मार्शल के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने हवा में पाकिस्तान के कुल छह विमान मार गिराए – इनमें पांच फाइटर जेट्स और एक बड़ा विमान शामिल था। ये बड़ा विमान AEW&C (Airborne Early Warning and Control) सिस्टम था, जिसे 300 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाया गया। इसे अब तक की सबसे लंबी दूरी की Surface-to-Air मिसाइल से की गई सफल मार कहा गया है।
इसके अलावा, ज़मीन पर स्थित पाकिस्तानी एयरबेस पर भी हमला किया गया। जैकबाबाद और भोलारी एयरबेस को हवाई हमलों से निशाना बनाया गया। इन हमलों में कई F-16 लड़ाकू विमान, जो मरम्मत में लगे थे, तबाह कर दिए गए। इस दौरान भोलारी में एक AEW&C विमान के नष्ट होने के संकेत मिले हैं। एयर चीफ मार्शल ने बताया कि पाकिस्तान वायुसेना ने भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को पार करने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। रूस से लिया गया यह सिस्टम भारत की सुरक्षा के लिए एक “गेम-चेंजर” साबित हुआ। इस ऑपरेशन में भारत ने सिर्फ हवाई लड़ाई ही नहीं लड़ी, बल्कि पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को भी टारगेट किया गया। इन हमलों में 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया।
बता दें कि ये पूरी कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। एयर चीफ ने ये भी बताया कि भारत ने इस हमले को पूरी तरह प्लानिंग और आज़ादी के साथ अंजाम देने में सफलता पाई। भारत सरकार की ओर से, सेना को साफ निर्देश दिए और किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना ने पूरे ऑपरेशन को कैलिब्रेटेड तरीके से अंजाम दिया – यानी सोच-समझकर, ताकि ज़रूरत से ज़्यादा टकराव ना हो। ऑपरेशन के दौरान किए गए हमलों के “पहले और बाद” की सैटेलाइट इमेजेस भी दिखाई गईं। साथ ही, लोकल मीडिया के जरिए मिले अंदरूनी फोटो भी मौजूद हैं, जिससे इस बार सबूत पेश करने में आसानी हुई। एयर चीफ ने माना कि बालाकोट हमले के बाद सबूत दिखाना मुश्किल था, लेकिन इस बार तैयारी पूरी थी। भारत की ओर से की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को समझ आ गया कि अगर लड़ाई जारी रही, तो उसे और नुकसान उठाना पड़ेगा। इसी वजह से 10 मई को युद्धविराम की घोषणा की गई।