
प्रमोद कुमार वर्मा
लोहागढ़ दुर्ग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उसके चारों ओर फैली सुजानगंगा नहर के एक हिस्से में चौबुर्जा का जीर्णोद्धार सरकारी तंत्र की अनदेखी के कारण आज तक अटका पड़ा रहा। जबकि बुर्ज की मरम्मत का जयपुर से टेण्डर हो चुका है।
इस दुर्ग की सुजानगंगा नहर हमेशा विदेशी हुकूमतों से प्रहार के दौरान दुर्ग की रक्षा करती रही लेकिन अब दुर्ग पुरातत्व विभाग और ठेकेदार के विवाद के गोले झेल रहा है।
दस माह बाद शुरू हुआ
चौबुर्जा के मरम्मत का कार्य दस माह बाद शुरू किया हो सका है। इसमें पुरातत्व विभाग और संबंधित ठेकेदार के बीच मनमर्जी से कार्य कराने का विवाद भी सामने आ रहा है, जिसका खामियाजा यह विरासत भुगत रही है।
तीस लाख में होगा कार्य
सरकार ने चौबुर्जा बुर्ज के चारों ओर कार्य के लिए करीब तीस लाख रुपए का टेण्डर किया था। जिसे वर्ष 2018 में फरवरी तक पूरा करने का समय निर्धारित था। जानकारी में आया है कि विभाग ठेकेदार से अपने मुताबिक कार्य चाहता है। वहीं ठेकेदार अपने हिसाब से कार्य चाहता है।
कचरा प्वाइंट बना बुर्ज क्षेत्र
चौबुर्जा बुर्ज के चारों ओर की दीवार और बुर्जों की मरम्मत की जा रही है। इससे दुकानदारों को काफी राहत मिलेगी। क्योंकि जहां कार्य चल रहा है उस जगह को कचरा प्वॉइंट बना दिया गया है तथा यह स्थल बदबू से सराबोर रहता है।
2016 में हुआ था टेण्डर
चौबुर्जा बुर्ज को पर्यटन के लिहाज से सौन्दर्यकरण बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने पुरातत्व विभाग को वर्ष 2016-मई में टेण्डर किया था। संबंधित ठेकेदार मरम्मत कार्य को आए। लेकिन विभाग की मनमर्जी नहीं मान लौट गए।
पन्द्रह दिन पूर्व हुआ शुरू
उपरोक्त विवाद के कारण ठेकेदार को लौटना पड़ा। दूसरी ओर पहले जून में बारिश ने कार्य की शुरूआत नहीं होने दी। अब यह कार्य पंद्रह दिन पहले शुरू हुआ है, जिसे डेढ़ महीने में पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
समय पर शुरू नहीं किया कार्य
सूत्रों का कहना है कि चौबुर्जा बुर्ज का विकास हो और इसका हैरिटेज स्वरूप लौटे। ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले लेकिन ठेकेदार मनमर्जी करते हैं। यही वजह है कि बुर्ज का कार्य टेण्डर होने के बाद समय पर शुरू नहीं हो पाया।
- चौबुर्जा बुर्ज की मरम्मत का टेण्डर गत वर्ष जयपुर से हुआ था। इसके बाद भी ठेकेदार ने कार्य शुरू नहीं किया। अब पन्द्रह दिन पहले कार्य शुरू कराया है। जो समय पर काम नहीं करते। ऐसे ठेकेदार को ब्लेकलिस्टेड करना चाहिए और नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हमने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की है।
सोहनलाल चौधरी, संभागीय अधीक्षक, पुरातत्व विभाग, भरतपुर
Published on:
29 May 2017 11:55 am
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