..and the breath stuck in the wombएम्बुलेंस से उतारा, ई-रिक्शा से अस्पताल पहुंचाई प्रसूता। जब तक मां की कोख में पल रहे गर्भ की धडकऩेंं सांसत में ही रहीं। प्रसूता को घर से एम्बुलेंस से अस्पताल तक पहुंचाने में हुए वाक्ये ने सबको हिला डाला। गड्ढे में फंसने पर जेसीबी भी पहुंची, खासी मशक्कत भी हुई।
..and the breath stuck in the womb
- सीवरेज खुदाई के बाद छोड़े गड्ढे में फंसी एम्बुलेंस
भरतपुर . शहर में बिजली घर के पास सीवरेज खुदाई के बाद छोड़े गए गड्ढे में शुक्रवार को एक प्रसूता के साथ उसकी कोख में पल रहे बच्चे की सांसें अटक गईं। गड्ढे में एम्बुलेंस फंसने के कारण प्रसव के लिए लाई जा रही प्रसूता दर्द से कराहती रही। बाद में उसे इ-रिक्शा से जनाना अस्पताल (janana hospital) पहुंचाया गया, लेकिन जिम्मेदार इस ओर आंखें मूंदकर ही बैठे रहे।
शहर में बिजली घर से लेकर नगर निगम कार्यालय के बीच चार दिन पहले सीवरेज के लिए लाइन खोदी गई थी। यहां खुदाई कर लाइन को ठीक तो कर दिया, लेकिन गड्ढे को आधा-अधूरा ही भरा गया है। ऐसे में यहां चार दिन से वाहन फंस रहे हैं।
शुक्रवार को गांव अघापुर से प्रसूता आशु (22) पत्नी रवि को एम्बुलेंस जनाना अस्पताल लेकर जा रही थी। इस दौरान एम्बुलेंस गड्ढे में फंस गई। काफी मशक्कत के बाद भी गाड़ी इसमें से नहीं निकल सकी। ऐसे में अंदर बैठी प्रसूता दर्द से कराहती रही। गड्ढे में फंसी गाड़ी को लोगों ने धक्का देकर निकालने का प्रयास भी किया, लेकिन पहिया गहरे तक गड्ढे में समा गया। ऐसे में काफी मशक्कत के बाद भी उसे नहीं निकाला जा सका। प्रसव पीड़ा अधिक होने पर आनन-फानन में महिला को इ-रिक्शा के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। बाद में एम्बुलेंस को जेसीबी की मदद से निकाला जा सका।
आए दिन फंस रहे वाहन, दुकानदार भी परेशान
गड्ढे के आसपास दुकान चलाने वाले दुकानदारों ने बताया कि यह प्रतिदिन की परेशानी बन गई है। आए दिन इसमें वाहन फंस रहे हैं। इसके चलते लोगों को परेशानी हो रही है। कई बार धक्का देकर वाहनों को निकालना पड़ रहा है। दुकानदारों ने बताया कि गड्ढे में खुदाई के बाद उसे भरने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं डाली गई है। ऐसे में अभी भी यहां गड्ढा बना हुआ है। इसमें वाहन फंस रहे हैं।