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देश की शान में शहीद जांबाज सैनिकों को सभी का नमन

भरतपुर. जब भी हमारे देश पर दुश्मनों की बुरी नजर पड़ी है तब-तब सरहदों पर तैनात सेना के जांबाजों ने अपनी जान न्यौछावर कर शहादतें लिखीं हैं। देश की आन-वान और शान के लिए हमारे वीर सपूतों ने वर्ष 1971 में सरहद पर ही नहीं, बल्कि दुश्मन मुल्क पाकिस्तान में घुसकर जान की आहुतियां देते हुए दुश्मन सैनिकों को आत्म समर्पण पर मजबूर कर दिया था।

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देश की शान में शहीद जांबाज सैनिकों को सभी का नमन

भरतपुर. जब भी हमारे देश पर दुश्मनों की बुरी नजर पड़ी है तब-तब सरहदों पर तैनात सेना के जांबाजों ने अपनी जान न्यौछावर कर शहादतें लिखीं हैं। देश की आन-वान और शान के लिए हमारे वीर सपूतों ने वर्ष 1971 में सरहद पर ही नहीं, बल्कि दुश्मन मुल्क पाकिस्तान में घुसकर जान की आहुतियां देते हुए दुश्मन सैनिकों को आत्म समर्पण पर मजबूर कर दिया था। यह दिन था 16 दिसम्बर 1971 का तब आज के दिन बांग्लादेश को स्वतंत्र देश का तमगा मिला था। मगर, हमारे देश के चार हजार सैनिकों ने प्राण न्यौछावर किए थे। इनमें भरतपुर जिले के तीन सैनिक भी शामिल रहे। आज हम 47 वर्ष पहले सैनिकों की दी गई आहुतियों को विजय दिवस के रूप में भरतपुर जिले के 63 शहीद सैनिकों की शहादत को याद कर श्रद्धांजलि दी है।

देश के लिए वर्ष 1971 में दिसम्बर का महीना अविस्मरणीय है। सैंतालीस वर्ष पूर्व इस वर्ष में 03 से 16 दिसम्बर तक (14 दिन तक) भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें 16 दिसम्बर को हमारे देश के सैनिकों ने पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों से आत्म समर्पण कराकर विजय प्राप्त की। वहीं पूर्वी पाकिस्तान को कब्जे में लेकर इसे बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र देश घोषित कराया था। मगर, इस युद्ध में हमारे देश के चार हजार सैनिक शहीद हुए थे। इनमें भरतपुर जिले के तीन शामिल हैं।

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल कुंवर वीरेंद्र सिंह ठेनुआ ने बताया कि विजय दिवस पर भरतपुर के बयाना तहसील के गांव महलौनी निवासी सिपाही पूरनङ्क्षसंह जाट रैजीमेंट, ब्रिगेड ऑफ गार्ड बदनसिंह निवासी बयाना के गांव मोरौली और डीग के गांव सुहेरा निवासी राजपूत रैजीमेंट में नायक रामस्वरूप सहित 63 शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि दी जाएगी। उनकी गाथा सुनाई जाएगी। इतिहास गवाह है कि यह विश्व में पहली बार हुआ था, जहां हमारे देश की सेना ने दूसरे देश की फौज से आत्म समर्पण कराया था। गौरतलब है कि पश्चिमी पाकिस्तान उस समय पूर्वी पाकिस्तान पर हाबी था। वहां मुक्ति वाहिनी सेना भी बन गई थी। लेकिन, पार पाना मुश्किल हो रहा था। तब भारत की सेना युद्ध में शामिल हो गई। युद्ध के शुरूआत में तीन दिसम्बर को पाक सेना ने हवाई हमले में भरतपुर और आगरा तक बम गिराए थे।

कर्नल ओमवीर सिंह ने बताया कि भारत की सेना ने पाक में घुसकर युद्ध किया था। उस समय पाक सेना के कमाण्डर एएजे नियाजी थे। वहीं हमारे देश के जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा थे। उस समय चारों ओर से घिरे पाक सैनिकों की स्थिति वहां के कमाण्डर ने देखी थी। तब पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को भारत के जनरल अरोड़ा के सामने पाक के कमाण्डर नियाजी ने समर्पण कराया था। यह समर्पण 16 दिसम्बर 1971 को बांंग्लादेश के ढाका में एग्रीमेंट से किया था। इस अवसर पर रविवार को शहीद स्थल पर जहां शहीदों को याद किया जाएगा। वहीं वीरांगनाओं का सम्मान और उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी।