
टूटी 87 साल प्राचीन परपंरा...गंगाजल में चंबल मिलाकर हो रहा अभिषेक
देवस्थान विभाग की ओर से प्राचीन मां गंगा महारानी मंदिर में गंगा जल नहीं मंगाने में लापरवाही बतरने का बड़ा मामला सामने आया है। एक साल से देवस्थान विभाग के आयुक्त के पास गुहार लगाई जाती रही, लेकिन उन्होंने धार्मिक आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर गौर तक नहीं किया। अब बीते करीब एक माह से शहर के प्रसिद्ध मां गंगा महारनी मंदिर में गंगा जल पूरी तरह से खत्म हो गया है। मंदिर में विराजमान मां गंगा महारानी की प्रतिमा को गंगाजल के बजाय चंबल के पानी से स्नान कराया जा रहा है और वहीं पानी भक्तजनों को चरणामृत के रूप में बांटा जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं में जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ रोष व्याप्त है।
गंगा मंदिर में गंगा जल के लिए एक हौज बना हुआ है। इसमें 15 हजार लीटर गंगा जल भरा जाता है, जो हर साल गंगा नदी से यहां लाया जाता है। यह जल करीब एक साल तक चलता है, फिर जब हौज में एक फुट गंगा जल शेष रहता है तो फिर से गंगा नदी से गंगा जल मंगवाया जाता है। यह परंपरा बीते 87 साल से चली आ रही है, लेकिन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते बीते साल वर्ष 2023 में गंगानदी से गंगाजल मंगवाया ही नहीं गया। इतना ही नहीं पुजारी के बार-बार गंगाजल लगाने के लिए गुहार लगाए जाने के बावजूद भी गंगाजल मंगाने की दिशा में देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त ने कोई कदम नहीं उठाया, इसका परिणाम यह है कि यहां गंगा जल खत्म हो गया।
यह है मामला
भरतपुर के अंतिम शासक महाराजा सवाई वृजेन्द्र सिंह ने 22 फरवरी 1937 में मंदिर में मां गंगा की मूर्ति स्थापित कराई थी। तभी से मंदिर में स्थापित मां गंगा की मूर्ति को रोजाना सुबह और शाम में गंगा जल से स्नान कराया जाता रहा है और फिर उस गंगा जल को चरणामृत प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता रहा है। गंगा मंदिर के पुजारी चेतन शर्मा ने बताया कि हौज में गंगाजल की कमी होने पर नवंबर 2023 में देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त को पत्र लिखकर गंगाजल मंगाने की डिमांड की गई। लेकिन फिर भी गंगाजल नहीं आया तो दिसंबर 2023 में दुबारा गंगाजल मंगाने के लिए सहायक आयुक्त को पत्र लिखा गया।
बीते साल मंगाया ही नहीं गंगाजल
बता दें कि एक साल में करीब 15 हजार लीटर गंगा जल की मंदिर को जरुरत होती है। प्राय: हर साल फायर बिग्रेड गंगा नदी से गंगाजल लेकर आती है, जिसे मंदिर में बने तीन हौजों में भर लिया जाता है। मंदिर को रोजाना करीब 20 से 40 लीटर गंगाजल की जरुरत होती है। गंगाजल का खासकर उपयोग मंदिर की मूर्ति स्नान और भक्तजनों को प्रसाद वितरण के रूप में किया जाता है। पिछली बार 16 सितंबर 2022 को मात्र 1000 लीटर गंगाजल आया था। उसके बाद बार-बार गुहार लगाए जाने के बावजूद वर्ष 2023 में गंगाजल मंगाया ही नहीं गया, इसलिए अब गंगाजल खत्म हो गया।
कब होती है गंगाजल की खासी जरुरत
मंदिर में गंगा दशमी, गंगा सप्तमी, गंगा अष्टमी, गंगा नवमी और गंगा दशहरा जैसे त्योहारों पर विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाती है। इन दिनों में भक्तों का सैलाव उमड़ता है। मंदिर में शोभायात्रा और भजन-कीर्तन का आयोजन भी होता है। मंदिर में गंगा माता की मूर्ति को भव्य श्रृंगार किया जाता है और उन्हें अलग-अलग वाहनों पर सवार कराया जाता है। ऐसे विशेष अवसरों पर मंदिर में भारी मात्रा में गंगाजल की जरुरत होती है।
वास्तुकला, धर्म, इतिहास और संस्कृति का समन्वय है गंगा मंदिर
बता दें भरतपुर का गंगा मंदिर वास्तुकला, धर्म, इतिहास और संस्कृति का समन्वय है। इस मंदिर का निर्माण 92 साल में पूरा हुआ था, जो 1845 से 1937 तक चला। इस दौरान भरतपुर के पांच शासकों ने अपने-अपने काल में इस मंदिर को बनवाया। मंदिर की वास्तुकला बहुत ही शानदार और देखने लायक है। यह दो मंजिला मंदिर है, जिसमें वास्तुकला की विभिन्न शैलियां हैं। मंदिर के खंबे सुंदर नक्काशी से ढंके हैं। प्रवेश द्वार पर एक ओर भगवान कृष्ण की गिरीराज पर्वत को उठाए हुए मूर्ति है, दूसरी ओर लक्ष्मी नारायण और शिव पार्वती की मूर्तियां हैं। मंदिर के अंदर मगरमच्छ पर सवार मां गंगा की प्रतिमा है, जो बहुत ही अनोखी और विलक्षण है, यह प्रतिमा मुस्लिम कारीगरों से बनाई गई थी। इस मंदिर का निर्माण भरतपुर के संपन्न निवासियों ने गंगा मंदिर के निर्माण के लिए एक महीने का वेतन दान में दिया था। इससे यह मंदिर भक्ति और दान का प्रतीक बना।
जल्द ही मंगवाएंगे गंगाजल: सहायक आयुक्त
प्राय: नगर निगम की दमकल से गंगा नदी से गंगाजल मंगवाया जाता था। लेकिन इस बार जब गंगाजल मंगवाने के लिए नगर निगम को पत्र लिखा तो निगम ने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी दमकल 10 साल पुरानी हो गई है। निगम की एक छोटी दमकल है, जिसमें मात्र 4500 लीटर पानी ही आता है, इसलिए उससे काम चल नहीं पाएगा। फिलहाल एक-दो दिन गंगाजल की वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे, ताकि पूजा अर्चना में बाधा नहीं आए। फिर जल्द ही किसी प्राइवेट से बात कर गंगा नदी से गंगाजल मंगवाने की व्यवस्था जल्द ही की जाएगी।
- कृष्ण कुमार खंडेलवाल, सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग भरतपुर
Published on:
06 Mar 2024 11:01 pm

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