
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यहां रामकटोरी चिकित्सालय में एक बालिका के ईलाज के लिए चिकित्सक द्वारा सरकारी पर्चे पर ब्रांडेड दवाएं लिखने का मामला उजागर हुआ है।
अब संबंधित चिकित्सक के खिलाफ पर्यवेक्षण टीम ने कार्रवाई करने की शिकायत की है। सरकार ने बीमारियों से ग्रसित बच्चों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क उपचार का प्रावधान रखा हुआ है। इसके लिए जिले में 21 टीमें जिले में काम कर रही हैं।
कटे होंठ-तालू, मस्तिष्क, टेढ़े-मेढ़े हाथ-पैर, पोलियो, नेत्र विकार या अन्य बीमारी से पीडि़त बच्चों का उनका इलाज कराना अभिभावकों के बस की बात नहीं हो पाती है। ऐसे बच्चों की स्क्रिनिंग कर चिन्हित किया जाता है। फिर नि:शुल्क उपचार दिया जाता है।
लिख दी ब्राण्डेड दवाएं
नदबई के गांव बिलौठी निवासी गुड्डी पत्नी केसरी की पुत्री काजल को आंखों की बीमारी है। नदबई टीम के चिकित्सक डॉ. राजेश गुप्ता व फार्मासिस्ट हीरेक सिंह गुर्जर काजल को नेत्र चिकित्सालय लाए। वहां चिकित्सक ने पर्चे पर सरकारी दवाई लिखने की बजाए बाजार की ब्राण्डेड दवाएं लिख दी।
मिन्नतें की, नहीं पसीजे डाक्टर
पांच जून को बालिका उपचार के लिए आई थी। मां गुड्डी देवी के पास दवा खरीदने के पैसे भी नहीं थे। गुड्डी और टीम सदस्यों ने दवा लिखने वाले चिकित्सक से कई बार सरकारी दवाई लिखने की मिन्नत की। लेकिन उन्होंने आरबीएस कार्यक्रम की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। इन हालात में टीम और बालिका को वापस लौटना पड़ा और इलाज नहीं हो सका।
कार्रवाई की मांग
गुड्डी और कार्यक्रम की टीम ने आरसीएचओ को संबंधित नेत्र चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग का पत्र लिखा है। साथ ही सरकारी पर्चे पर लिखी बाजार की ब्रांडेड दवाइयों को भी दिखाया है।
अब नोटिस थमाएंगे
विभाग ने पीएमओ को पत्र लिखकर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई का नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है।
Published on:
10 Jun 2017 11:22 am
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