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एक ही दिन में एक साल पुरानी तारीख में बना दी एफडी, डकारा ब्याज

-त्रैमासिक रिपोर्ट बनाई तो खुला सवा करोड़ रुपए का घोटाला

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एक ही दिन में एक साल पुरानी तारीख में बना दी एफडी, डकारा ब्याज

एक ही दिन में एक साल पुरानी तारीख में बना दी एफडी, डकारा ब्याज

भरतपुर. पिछले लंबे समय से विवादों में घिरी दी भरतपुर सैंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में अब सवा करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर घमासान मचा हुआ है। मंगलवार को भी अपेक्स मुख्यालय से महाप्रबंधक सीएम भारद्वाज के नेतृत्व में गठित टीम ने जांच की। उल्लेखनीय है कि अप्रेल से जून माह तक की त्रैमासिक रिपोर्ट तैयार की गई तो इसमें सामने आया कि ऋण वितरण 78 से 80 करोड़ रुपए का किया गया था, जबकि बैलेंस शीट में 105 करोड़ रुपए बोल रहे थे। करीब 26 करोड़ रुपए के ऋण वितरण पर सवाल खड़ा हुआ तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। हालांकि यह घोटालों बैंक के साथ हुआ है। इसमें किसी भी उपभोक्ता के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं है। चूंकि घोटाले को लेकर उपभोक्ताओं में भी हलचल तेज हो गई थी। बताते हैं कि बैंक के सॉफ्टवेयर के माध्यम से जितनी भी एफडी बनाई गई, वे सभी एक साल पुरानी तारीख में बनाई गई। सॉफ्टवेयर में इसका पता तक नहीं चला। जिस तारीख में एफडी खोली गई, उसी दिन उसे बंद कर दिया गया और एक साल का ब्याज खाते में जमा कर डकार लिया गया। जांच के लिए गठित टीम सदस्य डीजीएम आरके शर्मा, एजीएम अमित शर्मा, मैनेजर राजेंद्र मीणा, एमएल स्वामी ने अधिकारियों के बयान दर्ज किए। साथ ही पुराना रिकॉर्ड खंगाला।

खंगाले जाएंगे ये दस्तावेज

जांच के दौरान वितरित ऋ ण राशि और ब्याज अनुदान पेटे राशि का पुनर्भरण, ऑडिट की स्थिति, खातों का मिलान, अंतर संबंधी विवरण, बीमा की स्थिति, विभिन्न मदों में व्यय, विभाग और बैंक से जाने वाले प्रपत्र और दिशा-निर्देशों की पालना की स्थिति को बारीकी से देखा जाएगा। निरीक्षण दल बैंक की हिस्सा पूंजी, कोष प्रबंधन, विनियोग, अमानतें, बैंकिंग और सोसायटी अधिनियम की पालना, उधार, ऋ ण अग्रिम, बजट घोषणाओं की क्रियान्विति की स्थिति, मांग, वसूली, बकाया की स्थिति, एनपीए, सीआरएआर, लेखांकन प्रणाली, कम्प्यूटराइजेशन की स्थिति, ऋ ण वितरण की स्थिति के दस्तावेज खंगाले जाएंगे। जांच के बाद यदि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ विभाग कड़ा कदम उठाएगा।

री-कंसलेशन भी हो सकती है बड़ी वजह

सूत्रों की मानें तो प्रदेशभर में रि कंसलेशन (अंक मिलान) लंबे समय से नहीं हुआ है। हालांकि यहां बैंक प्रबंधन ने दावा किया है कि सितंबर माह तक का री कंसलेशन हो चुका है। साथ ही कुछ स्थानों पर बैंकों का यह मामला भी सामने आया था कि फर्जी खाता बनाकर वहां राशि डाल दी जाती है, ताकि ऑडिट में उसका पता भी नहीं चलता है।

चार माह पहले एमडी भी हो चुके हैं निलंबित

जिले में अल्पकालीन फसली ऋ ण लेने वाले करीब 77000 किसानों का जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा नहीं कराने के मामले में राज्य सरकार ने कुछ महीने पहले दी भरतपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के एमडी रामप्रसाद मीणा को भी निलंबित कर दिया था। उस समय भरतपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक (सीसीबी) की नदबई शाखा से स्वयं सहायता समूहों को बांटे गए लोन में भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। हकीकत यह है कि पिछले कुछ सालों के दौरान इस बैंक में कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। यही कारण है कि यहां आए दिन प्रबंधन व समिति के बीच विवाद होते रहे हैं। एक बार तत्कालीन जिला कलक्टर ने भी जांच के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा था।