
फाइल फोटो पत्रिका
Bharatpur : भरतपुर के लोहागढ़ किले में स्थित शहर के आराध्य ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे का हीरा गायब करने का प्रकरण उलझ गया है। मंदिर में हीरा नवंबर 2024 में चढ़ाया गया था, जबकि इसका बिल दिसंबर 2024 का निकला है। बिल सुपुर्दगी की बाद जमा कराया गया था। खुद विभाग के अधिकारी भी शिकायत को लेकर पशोपेश में हैं। आप शिकायत करने वाली महिला भी जांच में सहयोग नहीं कर रही है। हालांकि देवस्थान विभाग ने अब हीरे को परखने की जिम्मेदारी जयपुर के खंडाका का ज्वैलर्स को सौंपी है।
जानकारी के अनुसार भरतपुर शहर की रणजीत नगर निवासी एक महिला ने नवंबर 2024 में बांके बिहारी जी मंदिर के लिए एक हीरा विभाग के सुपुर्द किया था, जो करीब 1.5 कैरट और उसकी कीमत 3.65 लाख रुपए का बताया गया था। महिला की ओर से हीरा, विभाग में सुपुर्द करते समय भी विभागीय रजिस्टर में हीरे की पुष्टि होने का कोई प्रमाण पत्र और बिल दर्ज नहीं कराया गया।
हीरे का बिल सुपुर्दगी के एक माह बाद महिला ने विभाग में जमा कराया आया था, जो कि दिल्ली की एक फॉर्म का था जो की 3 दिसंबर 2024 का है। उसे समय भी शिकायतकर्ता महिला ने विभाग से कोई रसीद नहीं मांगी। इसके बाद महिला ने मार्च 2025 में विभाग से रसीद की मांग की और जनवरी 2026 में विधायक के जरिए मामले की शिकायत की। इतना ही नहीं ठाकुर जी की चांदी की जूतियां का भी रिकॉर्ड विभाग के सुपुर्दगी रजिस्टर और बिल से मेल नहीं खा रहा है।
श्रीबांके बिहारी मंदिर में चढ़ावा राशि की बात हो या पोशाक चढ़ाने की, विवादों से पुराना नाता रहा है। लंबे समय से कभी चढ़ने की रसीद नहीं काटने तो कभी मनमाने तरीके से पोशाक चढ़ाने की राशि व्यय करने की शिकायत आती रही है, लेकिन ऐसे मामलों में देवस्थान विभाग व जिम्मेदारों की चुप्पी संदेह के घेरे में रहती है
20 जनवरी 2026 को भरतपुर विधायक डॉक्टर सुभाष गर्ग ने देवस्थान विभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। विधायक सुभाष गर्ग के अनुसार श्रद्धालु मीरा ने मंदिर में हीरा, चांदी की चरण पादुका और कीमती पोशाकें भेंट की थी। लेकिन देवस्थान विभाग भरतपुर की ओर से इन वस्तुओं का कोई लेखा-जोखा नहीं रखा गया। इससे श्रद्धालु की आस्था को गहरा आघात पहुंचा। विधायक डॉक्टर सुभाष गर्ग ने अपने पत्र में लिखा था कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। वहीं दूसरी ओर बात करें तो ठाकुरजी का हीरा गायब होने का मामला तब जग जाहिर हुआ जब विवादों में आने के बाद मंदिर के पूर्व पुजारी को हटाकर नए पुजारी को लगाया गया। इससे पहले किसी ने भी प्रकरण में शिकायत नहीं की थी।
विधायक की ओर से देवस्थान विभाग के कमिश्नर को शिकायत दी गई। इसके बाद मामला भरतपुर देवस्थान विभाग में पहुंचा। जब रिकॉर्ड खंगाल तो भिन्नता मिला। वहीं हीरे की जांच अब जयपुर के खंडाका ज्वेलर्स को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
मुकेश मीणा, सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग
Published on:
22 Mar 2026 04:20 pm
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