भरतपुर. गर्भ में मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। दुनिया को देखने की हसरत मुझे कोख में भी प्रफुल्लित कर रही थी। मानो, बांह फैलाकर मेरे दीदार को दुनिया उतावली हो, लेकिन मुझे इल्म भी नहीं था कि 21वीं सदी में भी मेरा बेटी होना गुनाह हो जाएगा। मां का आंचल मेरे लिए पूरी दुनिया था। आज मैं अस्पताल में अपनी मां की गंध नहीं पाकर बेचैन हूं। मुझे नहीं पता था कि मेरा बेटी होना खता हो जाएगा। दादी आपने भी कभी किसी की बेटी के रूप में ही जन्म लिया होगा। मैं दुलार नहीं तो दुत्कार के बीच ही जी लेती, लेकिन आपके तानों ने मुझसे मां की ममता ही छीन ली। यदि दुधमुंही अपनी पीर बयां कर पाती तो शायद उसके शब्द कुछ ऐसे ही होते।
शहर के जनाना अस्पताल परिसर में 25 मई की रात्रि को एक मां अपनी दुधमुंही बेटी को बेंच पर छोड़ गई थी, जिसे अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में रखा गया है। यहां वह मदर मिल्क बैंक से मिलने वाले दूध पर निर्भर है। हालांकि पहले बालिका को 10 एमएल दूध दिया जा रहा था, जो अब बढ़ाकर 20 एमएल कर दिया गया है। बालिका को हर दो घंटे पर दूध दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि सास के तानों से तंग आकर एक मां इस बेटी को लावारिस हाल में छोडकऱ चली गई थी। मां ने बेटी के पास एक पत्र भी छोड़ा था। पत्र में लिखा था कि ‘मेरे छह लडक़ी हो गई हैं। इसलिए मेरी सास परेशान करती है। इसलिए यह कदम उठाया है। मेरी बेटी को पाल लो। तुम्हारा एहसान होगा। मुझे माफ कर दो…।’ यह पत्र हर किसी को आहत कर गया।
पता नहीं कब नसीब होगी गोद
अस्पताल परिसर में छोड़ी गई बेटी को पता नहीं गोद कब नसीब होगी। वजह, अभी वह अस्पताल में है। बाल कल्याण समिति के आदेश पर अब उसे शिशु गृह में आवासित कराया जाएगा। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद उसे गोद देने की प्रक्रिया होगी। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ही उसे सीने से लगाए हुए है। अभी पुलिस की जांच भी आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसे में बालिका के परिजनों का भी पता नहीं चल सका है। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राजाराम भूतौली ने बताया कि पुलिस जांच में थोड़ा समय लगेगा।
इनका कहना है
-बच्ची की दोबारा से रिपोर्ट कराई थीं। अब संक्रमण की स्थिति में काफी सुधार है। इस आधार पर उसकी एक-दो दिन में छुट्टी की जा सकती है।
डॉ. हिमांशु गोयल, प्रभारी शिशु रोग विभाग