भरतपुर

जिला अस्पताल में बन रहे फर्जी आयु प्रमाण-पत्र!

जिला आरबीएम अस्पताल में चोरी-छिपे फर्जी आयु प्रमाण-पत्र बनाने का खेल रहा है। ये खेल पकड़ में भी नहीं आता, अगर एक व्यक्ति अपनी पत्नि को बालिग होने के लिए जिला कलक्टर के यहां पर मेडिकल बोर्ड से जांच कराने का आवेदन नहीं करता।

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May 12, 2019
Fake Age Certificate

भरतपुर. जिला आरबीएम अस्पताल में चोरी-छिपे फर्जी आयु प्रमाण-पत्र बनाने का खेल रहा है। ये खेल पकड़ में भी नहीं आता, अगर एक व्यक्ति अपनी पत्नि को बालिग होने के लिए जिला कलक्टर के यहां पर मेडिकल बोर्ड से जांच कराने का आवेदन नहीं करता। उक्त व्यक्ति ने आवेदन के साथ पत्नी का आयु प्रमाण पत्र लगाया था, जिसमें उसे बालिग बताया है। जबकि पुलिस ने दस्तयाब की उसकी पत्नी का जिला आरबीएम अस्पताल में मेडिकल ज्यूरिस्ट से मेडिकल कराया तो वह उसमें नाबालिग निकली थी। इस फर्जी आयु प्रमाण पत्र के सामने आने पर मेडिकल ज्यूरिस्ट विभाग में हडक़ंप मच गया, जिस पर अंदुरुनी जांच की गई है। उसमें इस तरह कोई प्रमाण-पत्र जारी होना नहीं बताया है। फर्जी प्रमाण पत्र सामने आने पर अब विभाग की ओर से मामले में उच्चाधिकारियों को अवगत करा मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि पहले भी एक-दो मामले आ चुके हैं। थाना चिकसाना में गत जनवरी में इलाके के एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसला कर भगा ले जाने का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने बाद में उसे दस्तयाब कर लिया। युवक इस दौरान उससे शादी कर ली और उसने पत्नी को बालिग होना बताया। जिस पर थाना पुलिस ने उक्त लडक़ी का जिला आरबीएम अस्पताल में मेडिकल कराया। मेडिकल ज्यूरिस्ट ने जांच में लडक़ी उम्र 16 से 17 साल बताई। जिस पर उसे पुलिस ने बालिका गृह में भिजवा दिया। उधर, कथित पति ने जिला कलक्टर ने यहां प्रार्थना पत्र देते कहा कि लडक़ी के पिता ने शादी के बाद उससे पैसे मांगे थे, नहीं देने पर उसने चिकसाना थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी। आरोप है कि उसने पुलिस से सांठ-गांठ कर उसकी उम्र का मेडिकल करा उसे नाबालिग बता दिया। उसका कहना है कि उसके पास पत्नी चिकित्सक का आयु प्रमाण पत्र है जिसमें उसकी आयु 19 साल बताई है। पति का कहना है कि दो चिकित्सकों की अलग-अलग राय होने से उसकी पत्नी की उम्र का परीक्षण मेडिकल बोर्ड से कराया जाए। जिस पर जिला कलक्टर ने मेडिकल बोर्ड से जांच कराने के आदेश कर दिए।

उधर, अप्रेल अंत में बोर्ड की गठित तय तारीख पति अस्तपाल नहीं पहुंचा। जिस आयु प्रमाण-पत्र में लडक़ी उम्र 19 साल बताई जा रही है। उस पर आरबीएम अस्पताल की फर्जी सील और एक चिकित्सक के हस्ताक्षर हो रहे हैं। लेकिन विभाग के तीनों डॉक्टरों में से ये किसी के हस्ताक्षर नहीं है। प्रमाण पत्र 1 अक्टूबर 2018 को जारी किया है। मेडिकल जांच की कॉपी आरबीएम अस्पताल के मेडिकल ज्यूरिस्ट के पास पहुंचने पर उन्होंने विभागीय रिकॉर्ड खंगाला तो उक्त तिथि और संबंधित लडक़ी का अस्पताल से कोई आयु प्रमाणित करने का प्रमाण-पत्र जारी होना नहीं मिला। जिला कलक्टर ने आवेदन में जिस आयु प्रमाण-पत्र की कॉपी लगी है, वह 1 अक्टूबर 2018 को जारी होना बताया है। उक्त तिथि में ड्यूटी पर मौजूद डॉ.लोकेन्द्र पाल सिंह व डॉ.सुदीप गुप्ता ने इस तरह का प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार किया है। वहीं, विभाग के हैड डॉ.अर्जित दत्ता ने ऐसा कोई प्रमाण-पत्र नहीं बना है। उधर, आरबीएम अस्पताल के मेडिकल ज्यूरिस्ट विभाग के डॉ.लोकेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि जिस प्रमाण पत्र का आवेदन के साथ दिया है, वह अस्पताल से जारी नहीं है। यह पूर्णतय फर्जी प्रमाण-पत्र है। अस्पताल के रिकॉर्ड में भी कोई एंट्री नहीं है। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है।

Published on:
12 May 2019 11:52 am
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