
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) के अशोका ग्रुप से संचालित होटल भरतपुर अशोक अब राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) चलाएगा।
होटल पिछले सप्ताह आईटीडीसी ने आरटीडीसी के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद आरटीडीसी के कर्मचारियों ने सोमवार को होटल का कामकाज संभाल लिया। आरटीडीसी की सुपुर्दगी में होटल आने पर इसको भरतपुर फॉरेस्ट लॉज के नाम से पहचाना जाएगा।
भरतपुर में अब दो होटल
राजस्थान पर्यटन विकास निगम के होटल अशोक का संचालन संभालने के बाद अब भरतपुर में उसके दो होटल हो गए हैं। पहले से शहर में जयपुर-आगरा हाई-वे किनारे सारस होटल का आरटीडीसी संचालन कर रहा है। यह होटल वर्ष 1982 में बना था। सारस होटल के मुकाबले होटल अशोक बड़ा और भव्य है। यह होटल तीन स्टार की श्रेणी में आता है।
वन विभाग ने किए हाथ खड़े
सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार ने पिछले दिनों होटल का संचालन राज्य सरकार को देने का प्रस्ताव रखा था। होटल वन विभाग की जमीन पर होने से राज्य सरकार ने पहले वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा की लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने होटल संचालन से इनकार दिया। जिस पर सरकार ने आरटीडीसी को सौंप दिया।
निजी हाथों में जाने से बचा
होटल अशोक केवलादेव उद्यान में वर्ष 1975 से संचालित है। वन विभाग ने आईटीडीसी को लीज पर जमीन सौंप रखी है। घना के राष्ट्रीय उद्यान बनने पर नियम और सख्त हो गए। नियमों के तहत मुख्य लीज धारक होटल को सब लीज पर दे या बेच नहीं सकता है। कानून की इस पेचीदगी से होटल निजी हाथों में जाने से बच गया।
सीजन में नहीं मिलता कमरा
राष्ट्रीय उद्यान में होने के कारण होटल अशोक में सीजन के दौरान कमरों की भारी डिमाण्ड रहती है। होटल के ज्यादातर कमरे नवम्बर से फरवरी तक एडवांस में फुल रहते हैं। होटल में 18 कमरे हैं। इसमें 5 स्थायी और 17 अस्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों का वेतन, पानी व बिजली सहित होटल का एक माह का खर्चा करीब 8 लाख रुपए बैठता है। बीते सीजन में होटल की कमाई एक करोड़ 30 लाख रुपए रही थी। हालांकि, इसके बावजूद होटल करीब 12 से 14 लाख रुपए घाटे में था।
Published on:
02 May 2017 11:25 am
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