बड़ी सोच और लघु उद्योग से बछामदी की मीरा ने पाया मुकाम

-रेडीमेड कपड़े बेचकर मीरा कमा रही है 20 हजार रुपए प्रतिमाह, पशुपालन भी उसकी आय में बना साझेदार

By: Meghshyam Parashar

Published: 30 Sep 2020, 03:33 PM IST

भरतपुर. साधारण सी पढ़ी लिखी सेवर के बछामदी गांव की मीरा ने जब से रेडीमेड कपड़े विक्रय का कार्य गांव में शुरू किया तो उसकी आमदनी से परिवार की तस्वीर बदल गई है अन्यथा मेहनत मजदूरी से उसका परिवार बड़ी मुश्किल से गुजारा कर रहा था। मीरा आज रेडीमेड वस्त्र बनाकर बेच रही है साथ ही पशुपालन का काम कर प्रतिमाह आसानी से 20 हजार रुपए कमा रही है। मीरा का पति वेदप्रकाश वाहन चलाने का काम करता है इस कार्य से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था किन्तु वर्ष 2002 में एक संस्था की ओर से गठित किए गए महिला स्वयं सहायता समूह में मीरा को शामिल कर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया और कार्य शुरू कराने के लिए राष्ट्रीय महिला कोष से 15 हजार रुपए का ऋण दिया जिस पर मीरा ने अपनी और राशि मिलाकर भैंस खरीदी और दूध विक्रय कर परिवार की आय में भागीदार बन गई।
दूध विक्रय के बाद भी मीरा ने आगे बढने के लिए सिलाई कार्य का प्रशिक्षण लिया और गांव में ही रेडीमेड वस्त्र बनाने का कार्य प्रारम्भ किया। इस कार्य के लिए संस्था ने 25 हजार रुपए की सहायता प्रदान की। इस राशि से मीरा ने सिलाई मशीनें व अन्य सामान खरीदा तथा पूरी लगन के साथ काम करने लगी। मीरा रेडीमेड वस्त्रों के कार्य को अकेली पूरा नहीं कर पा रही थी तो उसने गांव की 12 और महिलाओं को इस कार्य से जोड़ लिया उन्हें भी 10 से 12 हजार रुपए की आमदनी मिलने लगी। रेडीमेड वस्त्रों का कार्य बढऩे लगा तो उसका पति भी इस कार्य में सहयोग करने लगा। आज स्थिति यह है कि गांव की महिलाएं मीरा के यहां से रेडीमेड वस्त्र खरीद रही हैं। रेडीमेड वस्त्र उत्पादन में हुई आमदनी को देखकर मीरा ने अपने पुत्र व पुत्रियों को भी बेहतर शिक्षा देना भी शुरू किया और पुत्र को एक संस्था की ओर से संचालित सुरक्षा गार्ड का प्रशिक्षण दिलाया जो आज नोयडा में स्थित बहुराष्ट्रीय कम्पनी में सुरक्षा गार्ड का कार्य कर प्रतिमाह 18 हजार रुपए कमा रहा है पुत्री ने भी सिलाई का कार्य सीखकर अमेजन कम्पनी में नौकरी शुरू की जो आज 20 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रही है। मीरा का सपना है कि वह रेडीमेड वस्त्र उत्पादन का कार्य जयपुर अथवा अन्य बड़े शहरों में शुरू करे ताकि उसकी आमदनी और बढ़ सके।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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