
Rajasthan Jat Reservation : भरतपुर, गांवों में जनसंपर्क करते हुए संघर्ष समिति के पदाधिकारी। फोटो पत्रिका
Rajasthan Jat Reservation : भरतपुर, धौलपुर व डीग जिले के जाटों को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की मांग बार-बार उठ रही है। इस बार आरक्षण देने की कवायद केंद्र सरकार पर टिकी हुई है, क्योंकि पिछले 11 वर्ष से केंद्रीय सेवाओं में जाट समाज आरक्षण का इंतजार कर रहा है। अब तक करीब 15 से अधिक आंदोलन हो चुके हैं। पूर्ववती कांग्रेस सरकार से लेकर वर्तमान भाजपा सरकार केंद्र सरकार को सिफारिशी पत्र लिख चुकी है। जानकारों की माने तो भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को केंद्र में आरक्षण दिए जाने की मांग साल 1998 से चल रही है। वर्ष 2013 में केंद्र की सरकार ने भरतपुर और धौलपुर जिलों के साथ अन्य 9 राज्यों के जाटों को केंद्र में ओबीसी का आरक्षण दिया था।
2014 में केंद्र में सरकार बदलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर 10 अगस्त 2015 को भरतपुर, धौलपुर के जाटों का केंद्र और राज्य में ओबीसी आरक्षण खत्म कर दिया गया। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 23 अगस्त 2017 को पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में दोनों जिलों के जाटों को ओबीसी में आरक्षण दिया गया था, लेकिन केंद्र ने यह आरक्षण नहीं दिया। तब से लेकर अब तक केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की मांग को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है।
वर्ष 2024 में उच्चैन के पास जयचौली में हुए आंदोलन के बाद वर्तमान भजनलाल सरकार की ओर से केंद्र को सिफारिशी पत्र लिखने के अलावा एक कमेटी गठित कर केंद्रीय ओबीसी आयोग के पास वार्ता को भेजी गई थी, लेकिन उस समय भी वार्ता में सहमति व आश्वासन के बाद मामला अब तक अटका रहा।
सितंबर 2021 में जब जाट समाज ने चक्का जाम का ऐलान किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 28 दिसंबर 2021 को दोनों जिलों के जाटों को केंद्र में ओबीसी में आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश पत्र लिखा था। इसके बाद आरक्षण संघर्ष समिति से दिल्ली ओबीसी कमीशन मिला। केंद्र सरकार के मंत्रियों से भी मुलाकात की, लेकिन आरक्षण नहीं मिल सका। जनवरी 2024 में जाट समाज ने उच्चैन के जयचौली में पड़ाव डाला था, उस समय भी भजनलाल सरकार ने सिफारिशी पत्र लिखने के अलावा कमेटी को केंद्र में वार्ता के लिए भेजा।
अगस्त 1999 में सीकर में एक चुनावी सभा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से यह वादा किया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने 27 अक्टूबर 1999 को अधिसूचना जारी कर जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया। भरतपुर और धौलपुर को इसलिए शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि वहां जाट पूर्व राजपरिवार से जुड़े थे। जबकि वास्तव में भरतपुर के जाट किसान थे।
भरतपुर-धौलपुर-डीग जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नैमसिंह फौजदार ने बताया कि जाट आरक्षण की हुंकार सभा 22 जून को सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक रहेगी। गर्मी को देखते हुए लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त हवा, पानी का इंतजाम किया गया है। सभा के मुख्य वक्ता आरएलपी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल होंगे।
सांसद संजना जाटव के अलावा तीन दर्जन से अधिक विभिन्न दलों व समाज के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। हालांकि अभी अन्य किसी ने भी स्वीकृति नहीं दी है। साथ संघर्ष समिति की ओर से गांव-गांव पीले चावल बांटकर सभा में आने के लिए निमंत्रण दिया जा रहा है।
Published on:
19 Jun 2026 11:00 am
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