
भरतपुर। फर्जी चोट। झूठी गवाही। घटनास्थल की दूरी कम-ज्यादा कर एफआइआर में मनगढ़ंत बातें लिखाकर तथ्यों से छेड़छाड़ करने वाले पुलिसकर्मी और रिपोर्टकर्ता अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। अब सूचना मिलने पर मौके पर जाने वाले पुलिसकर्मी को घटना स्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने के साथ घायल व्यक्ति की चोट भी कैमरे में कैद करनी होंगी, ताकि तथ्य सलामत रह सकें।
इसको लेकर पुलिस महानिरीक्षक ने संभाग के सभी जिलों के एसपी को निर्देश जारी किए हैं। रेंज में आपराधिक घटना होने की सूचना पर थाने से ड्यूटी ऑफिसर या बीट प्रभारी मौके पर पहुंचते हैं, लेकिन घटनास्थल पर पहुंचने के बाद यह पुलिसकर्मी घटनास्थल की स्थिति का निरीक्षण करते समय फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी नहीं करते। इतना ही नहीं घटना में घायल व्यक्ति की चोटों की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी तक भी नहीं की जाती है। इसके चलते घटना एवं आहत व्यक्ति की चोटों के वास्तविक तथ्यों के परिवर्तित होने की आशंका रहती है।
इसका असर यह होता है कि अनुसंधान के दौरान घटना की सत्यता को विधीय जटिलता के कारण स्पष्ट किए जाने में पुलिस एवं अनुसंधान अधिकारियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। साथ ही पुलिस अनुसंधानिक कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह भी लगता है। आईजी ने निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में घटित होने वाली आपराधिक घटनाओं की सूचना प्राप्त होने पर थाने से जो भी पुलिस अधिकारी सर्वप्रथम घटनास्थल पर पहुंचता है तो घटनास्थल की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी आवश्यक रूप से की जाए।
Published on:
29 Mar 2024 03:25 pm
बड़ी खबरें
View Allभरतपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
