1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वाह री सरकार! स्वायत्तशासी संस्था के कार्मिक नहीं सरकारी कर्मचारी

- दो आदेशों ने बढ़ाई कर्मचारियों की परेशानी

2 min read
Google source verification
वाह री सरकार! स्वायत्तशासी संस्था के कार्मिक नहीं सरकारी कर्मचारी

वाह री सरकार! स्वायत्तशासी संस्था के कार्मिक नहीं सरकारी कर्मचारी

भरतपुर . स्वायत्तशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों पर भले ही सरकार सभी सरकारी नियम लागू कर रही हो, लेकिन पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की बारी आई तो सरकार इन्हें सरकारी कर्मचारी ही नहीं मान रही है। अब ऐसे कार्मिक खासी उलझन में है। एक तरफ सरकार ने पुरानी पेंशन योजना लागू कर वाहवाही लूट ली, लेकिन स्वायत्त शासी संस्थाओं में लगे कर्मचारी फिलहाल इस लाभ से वंचित नजर आ रहे हैं। अब ऐसे कार्मिक अपनी पीड़ा को लेकर यहां-वहां घूम रहे हैं।

स्वायत्तशासी संस्थाओं में लगे अधिकारी अब कर्मचारियों को नए-नए दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं। हाल ही में जयपुर में एक निगम के अधिकारी की ओर से इसके लिए फरमान जारी किया गया कि 1 जनवरी 2004 एवं उसके बाद नियुक्त कार्मिकों की ओर से एनपीएस के अंतर्गत 1 अप्रेल से 28 अगस्त 2022 तक आहरण की गई राशि को 31 दिसम्बर 2022 तक एनपीएस कार्मिकों की जिस बजट पद से वेतन से पीपीएफ कटौतियां जमा की जा रही हैं, उसी मद में जमा कराएं। आदेश में कहा कि जिन कार्मिकों की ओर से एनपीएस राशि का आहरण कर लिया है। वह संस्थापन शाखा में आगामी पांच दिन में संपर्क कर एनपीएस आहरण राशि को विभागीय आदेशानुसार संबंधित मद में जमा कराया जाना सुनिश्चित करें। विभागीय आदेश की पालना में एनपीएस आहरण राशि दोबारा संबंधित मद में जमा नहीं कराने, देरी से कराने के लिए संबंधित कार्मिक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा। ऐसे कार्मिकों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। खास बात यह है कि यदि स्वायत्तशासी कर्मचारी एनपीएस में हैं तो उनसे जबर्दस्ती पैसा क्यों जमा कराया जा रहा है, जबकि सरकारी कर्मचारियों को अपनी पूरी सर्विस के दौरान तीन बार एनपीएस का पैसा निकालने की अनुुमति होती है। ऐसे में दो आदेश आपस में विरोधाभासी नजर आ रहे हैं।

इस आदेश में नहीं माना सरकारी कर्मचारी

अतिरिक्त निदेशक एनपीएस (सैब) राजबहादुर राजोरिया की ओर से 7 दिसम्बर को सभी स्वायत्त संस्थाओं को पत्र लिखा गया है। राजोरिया ने पत्र में लिखा है कि 1 जनवरी 2004 एवं उसके बाद स्वायत्तशासी संस्थाओं में नियुक्त कार्मिकों के लिए वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 18 अप्रेल 2022 के अनुसार सैब संस्थाओं में एनपीएस योजना ही लागू है। सैब संस्थाओं में एक जनवरी 2004 एवं उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं की गई है। पुरानी पेंशन योजना केवल राज्य सरकार के कर्मचारियों पर ही लागू है। ऐसे में सभी सैब संस्थाएं अपनी संस्था में 1 जनवरी 2004 एवं उसके बाद नियुक्त कार्मिकों का नियमित अंशदान एनएसडीएल को जमा कराया जाना सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने दिया था तोहफा

23 फरवरी 2022 को विधानसभा में अशोक गहलोत ने पुरानी पेंशन योजना को राजस्थान में लागू करने की घोषणा की थी। गहलोत के फैसले ने लगभग 7 लाख कर्मचारियों को खुश कर दिया, लेकिन लाभ अभी भी पूरे कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहा है। एक अप्रेल 2004 के बाद नियुक्ति पाने वाले कर्मचारी अभी भी पुरानी पेंशन स्कीम की मांग कर रहे हैं।

इनका कहना है

अभी इस पर निर्णय होना बाकी है। ओल्ड पेंशन योजना 1 अप्रेल से पहले की सभी संस्थाओं पर लागू है। इसके बाद की संस्थाओं को लेकर अभी मशक्कत की जा रही है। इस पर सरकार ही निर्णय लेगी। हालांकि कुछ मेरे पास क्वेरी आई थीं, जिन्हें क्लीयर कर दिया गया है। शेष संस्थाएं बमुश्किल 5 से 10 प्रतिशत ही हैं, इनके लिए भी राज्य सरकार के स्तर पर कवायद की जा रही है।

- राजबहादुर राजोरिया, अतिरिक्त निदेशक एनपीएस (सैब)

Story Loader

बड़ी खबरें

View All

भरतपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग