
Prachi Karola : राजस्थान के भरतपुर की युवा निशानेबाज प्राची करोला। फोटो पत्रिका
Prachi Karola : बेटियां अब महज घर-परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहराकर समाज की तस्वीर बदल रही है। शिक्षा, प्रशासन, सेना, विज्ञान और खेल जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही है। इसी बदलते भारत की एक मजबूत तस्वीर भरतपुर की युवा निशानेबाज प्राची करोला है, जिन्होंने अपनी मेहनत, अनुशासन और अचूक निशाने से साबित कर दिया कि बेटियां अवसर मिलने पर किसी भी मंच पर देश और जिले का नाम रोशन कर सकती है। स्टेट स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी पहचान बनाने वाली प्राची आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं।
राजस्थान और राष्ट्रीय स्तर पर पदकों की झड़ी लगाने के बाद अब उनकी निगाहें ओलंपिक के मंच पर देश के लिए पदक जीतने पर टिकी है। रोजाना करीब छह घंटे का कठिन अभ्यास उनके इसी सपने की नींव है। प्राची की शूटिंग यात्रा किसी पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा नहीं थी। यह सफर परिवार के प्रोत्साहन और उनके अपने जज्बे से शुरू हुआ।
उनके पिता हेमंत कुमार करोला बताते है कि शुरुआत में उनका स्वयं का गन लाइसेंस बनवाने का विचार था, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने बेटे को शूटिंग के लिए प्रेरित किया। घर में भाई को अभ्यास करते देखकर प्राची के मन में भी इस खेल के प्रति रुचि जगी। उन्होंने भी गन थामी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
भरतपुर की एक निजी शूटिंग अकादमी से प्रशिक्षण शुरू करने वाली प्राची ने शुरुआती दिनों में ही अपनी प्रतिभा से प्रशिक्षकों को प्रभावित कर दिया। लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने वर्ष 2023 में जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय 10 मीटर शूटिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई। यही उपलब्धि उनके खेल जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
राज्य स्तर की सफलता के बाद प्राची ने भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सा लिया। पहली ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि उनकी सफलता महज संयोग नहीं, बल्कि लगातार मेहनत का परिणाम है। आज प्राची उन बेटियों में शामिल है, जो यह संदेश दे रही है कि प्रतिभा को अवसर, परिवार का सहयोग और निरंतर मेहनत मिले तो छोटे शहरों की बेटियां भी विश्व मंच पर भारत का तिरंगा बुलंद कर सकती है।
प्राची 25 मीटर शूटिंग स्पर्धा में अपनी प्रतिभा निखार रही हैं। इसके लिए वह दिल्ली की प्रतिष्ठित शूटिंग अकादमी में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण ले रही है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर की सफलताओं के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ट्रायल के लिए भी क्वालिफाइ किया और विश्व स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
प्राची ने मिस्र में आयोजित वर्ल्ड कप में भारत की ओर से खेलकर सबका ध्यान खींचा। यहां प्राची ने 63 देशों के खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2025 में जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड कप में भी उन्होंने हिस्सा लिया और पांचवें स्थान पर रहकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने उनके भविष्य को और मजबूत बनाया है।
प्राची का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मंच है। वे चाहती है कि अधिक से अधिक लड़कियां खेलों से जुड़े और अपने सपनों को सीमित न रखें। उनका कहना है कि यदि परिवार भरोसा करे और बेटियां मेहनत से पीछे न हटे तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। यही सोच उन्हें भरतपुर ही नहीं, पूरे प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रही है।
प्राची का कहना है कि हर खिलाड़ी का सपना देश के लिए खेलना और तिरंगा बुलंद करना होता है। उनका अंतिम लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। इसी उद्देश्य के साथ वह प्रतिदिन लगभग छह घंटे अभ्यास करती हैं। खास बात यह है कि वह किसी दूसरे खिलाड़ी को नहीं, बल्कि खुद को ही अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानती हैं।
उनका मानना हर दिन खुद से बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। भरतपुर की यह गोल्डन गर्ल आज जिले की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका सफर संदेश देता है कि मजबूत इरादे, अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर छोटे शहरों से निकलकर भी विश्व मंच तक पहुंचा जा सकता है।
Published on:
03 Jul 2026 08:55 am
