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नौकरी नहीं कृषि में तलाशा भविष्य, ग्रेज्युएट युवा कमा रहा 1 लाख/ माह

उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद जहां अमूमन युवा निजी क्षेत्र में नौकरी की तलाश या सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं, वहीं जिले के गांव विजयपुरा निवासी युवक तेजवीर सिंह ने बीएड की पढ़ाई करने के बाद शिक्षक भर्ती की तैयारी करने के बजाय कृषि क्षेत्र में भविष्य तलाशते हुए अपनी पैतृक जमीन में खेती करने का निर्णय लिया।

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क/भरतपुर। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद जहां अमूमन युवा निजी क्षेत्र में नौकरी की तलाश या सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं, वहीं जिले के गांव विजयपुरा निवासी युवक तेजवीर सिंह ने बीएड की पढ़ाई करने के बाद शिक्षक भर्ती की तैयारी करने के बजाय कृषि क्षेत्र में भविष्य तलाशते हुए अपनी पैतृक जमीन में खेती करने का निर्णय लिया। उसने बागवानी विभाग से मदद लेकर वैज्ञानिक तरीके से ताइवानी पपीता की फसल तैयार की। जिससे वह अब हर माह एक लाख रुपए की आमदनी कमा रहा है।

अपनी सफलता की कहनी बताते युवा एवं प्रगतिशील किसान तेजवीर सिंह ने बताया कि उसने ताइवानी पपीता के बीज मंगा कर खुद पौध तैयार की। 5 बीघा खेत में मिट्टी के बेड तैयार कर 1600 पौधे लगाए। इस दौरान मल्च और लो टनल का उपयोग कर पपीता के पौधों को रोग और मौसम की मार से भी बचाया। साथ ही ड्रिप फार्मिंग से पपीतों की सिंचाई की। इससे जहां पपीता की फसल को सही ग्रोथ मिली वहीं इन सुविधाओं के लिए बागवानी विभाग से 75 प्रतिशत तक अनुदान भी मिला। पपीता की बुवाई आदि की लागत करीब 2.50 लाख रुपए आई थी। पपीता की फसल को तैयार होने में करीब 6 माह का वक्त लगा। इस दौरान पपीता के पौधों के बीच में जो खाली जगह थी उसमें गेंदा और टमाटर के पौधे लगा दिए।

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मई 2023 तक (6 माह में ) करीब 2 लाख रुपए के गेंदा और 50 हजार रुपए के टमाटर की पैदावार हो गई। इससे पपीता की बुवाई की लागत निकल आई। और अब जुलाई से पपीता की पैदावार होना शुरू हो गई है। हर माह करीब 20 क्विंटल तक पपीता की पैदावार हो रही है। मंडी में भाव भी बहुत अच्छा 50 रुपए प्रति किलो तक मिल रहा है। ऐसे में ताइवानी पपीता से हर माह करीब 1 लाख रुपए तक आय हो रही है। आगामी करीब डेढ़ साल तक इन्हीं पौधों से पपीता की फसल मिलती रहेगी। यदि सब कुछ ठीक रहा और अच्छे भाव मिले तो आगामी डेढ़ साल में 20 लाख रुपए तक आय होने की संभावना है।

तेजवीर सिंह ने बताया कि सामान्य पपीता के पेड़ की बजाय ताइवानी पपीता पर तीन गुणा अधिक फल लगता है। साथ ही किसान को परंपरागत खेती के बजाय तीन से चार गुणा अधिक आय होती है। ऐसे में किसान को परंपरागत खेती के बजाय वैज्ञानिक तरीके से बागवानी वाली खेती कर अच्छा मुनाफा कमाना चाहिए। जिससे किसान आर्थिक रूप से समृद्ध बन सके।

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फैक्ट फाइल
- 5 बीघा खेत में लगाए ताइवानी पपीता के 1600 पौधे
- पपीता की बुवाई पर आई लागत 2.50 लाख रुपए
- पपीता के साथ गेंदा और टमाटर की फसल से 6 माह में कमा लिए 2.50 लाख रुपए
- पपीता के एक पेड़ पर साल में लगता है औसतन 100 किलो फल
- एक बार पौधा लगाने के बाद लगातार 2 साल तक हौती है पैदावार
- ताइवानी पपीता से होती है 12 मासी आय
- पपीता की खेती से हर माह कमा रहा 1 लाख रुपए से अधिक