5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

साफा विद ट्विटर…महाराजा सूरजमल की पगड़ी के लिए दिल्ली से जंग जीतकर मां के चरणों में रख दी थी जवाहरसिंह ने दौलत

-कैबीनेट मंत्री के पगड़ी विद ट्विटर को सराह रहे नेता व अफसर

2 min read
Google source verification
साफा विद ट्विटर...महाराजा सूरजमल की पगड़ी के लिए दिल्ली से जंग जीतकर मां के चरणों में रख दी थी जवाहरसिंह ने दौलत

साफा विद ट्विटर...महाराजा सूरजमल की पगड़ी के लिए दिल्ली से जंग जीतकर मां के चरणों में रख दी थी जवाहरसिंह ने दौलत

भरतपुर. पगड़ी सिर पर रखी जाने वाली कोई सामान्य चीज नहीं है, इतिहास गवाह है कि पगड़ी से देश, परिवार व समाज का सम्मान जुड़ा होता है। पर्यटन एवं देवस्थान के कैबीनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह राजस्थानी संस्कृति को प्रमोट करने के लिए साफा विद ट्विटर अभियान शुरू किया है। इससे कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा नेताओं के साथ ही तमाम अफसर भी जुड़ रहे हैं। ऐसे में पगड़ी को लेकर सम्मान के उदाहरणों को तलाशा तो कुछ रोचक तथ्य निकल कर सामने आए।
वरिष्ठ साहित्यकार रामवीर सिंह वर्मा ने बताया कि 25 दिसंबर 1763 को महाराजा सूरजमल की मृत्यु के बाद जब महाराजा जवाहरसिंह को राज सिंहासन पर बैठाया गया तो उनको पगड़ी बांधकर भरतपुर राज्य का शासक घोषित किया गया। पगड़ी बांधने के बाद जब वो महारानी किशोरी से आशीर्वाद लेने गए तो महारानी किशोरी ने उलाहना देते हुए कहा कि तुम्हारे पिता की पगड़ी तो दिल्ली में है। तुम इस पगड़ी को बांधकर मेरे सामने आए हो। जब तक अपने पिता की पगड़ी का प्रतिशोध नहीं लेते मेरे सामने मत आना। महाराजा सवाई जवाहर सिंह को यह बात चुभ गई और उन्होंने माता से कहा कि मेरे पास सबकुछ है पर धन नहीं है। महारानी किशोरी ने कहा कि धन की चिंता मत कर, भरतपुर से दिल्ली तक सोने की मोहर से सड़क बनवा दूंगी। पिता की पगड़ी का बदला जरूर लेकर आना। फरवरी 1764 में महाराजा जवाहरसिंह ने दिल्ली पर हमला किया। दिल्ली को जीतने के बाद सबकुछ लाकर माता के चरणों में लाकर रख दिया। वो सबकुछ गोवर्धन के कुसुम सरोवर में डलवा दिया गया। वहां जाल भी लगवा दिया गया। आज भी कुसुम सरोवर में लोहे का भारी जाल इसका प्रमाण है।

जयपुर के राजा जयसिंह ने पहनाई थी राजा बदनसिंह को पगड़ी

वरिष्ठ साहित्यकार वर्मा ने बताया कि डीग की सैनिक छावनी के मध्य शामियाना के नीचे चैत्र शुदी परवा संवत् 1779, 23 नवंबर 1722 ई. को बदनसिंह का राजतिलक हुआ। जयपुर के राजा जयसिंह ने स्वयं तिलक लगाकर पगड़ी बांधकर एवं राजचिन्ह प्रदान करके उन्हें इस क्षेत्र का राजा मनोनीत किया। सवाई जयसिंह की ओर पहनाई गई पगड़ी जो कि सामान्य बोलचाल की भाषा में साफा कहा जाता है। यह एक ऐसे सम्मान का प्रतीक है इसको केवल परिवार, समाज या पाल का मुखिया धारण करता था।

ये भी है वीरता का आभास कराते शब्द

साहित्यकार वर्मा बताते हैं कि उस समय महाराजा जवाहरसिंह से महारानी किशोरी ने कहा था कि ओ बेटा तेरे सिर पगड़ी बंधे लाज न आवत तोय, जा पगड़ी की लाज देखि दिल्ली में गई खोय, दिल्ली में गये खोय पजरि रहे पीते, तेरे पितायै मारि तुर्क फिरै रण जीते...। इसके बाद महाराजा जवाहरसिंह ने पिता की पगड़ी का मान रखने का वचन दिया था।

सचिन पायलट ने 26 सेकंड में पगड़ी पहनने का वीडियो डाला

कैबीनेट मंत्री की इस मुहिम का खास रेस्पांस देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार के कई मंत्री व दर्जनभर से अधिक विधायक पगड़ी संस्कृति के पक्ष में ट्वीट कर रहे हैं। डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने 26 सेकंड में साफा पहनने का वीडियो ट्वीट किया। कांग्रेस नेता शशि थरूर, भाजपा की सांसद दीया कुमारी आदि ने भी इस मुहिम का समर्थन किया है। हालांकि यह मुहिम राजनीतिक गलियारों में भी खास चर्चा का विषय बनी हुई है।