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‘अगर प्रताडि़त हो गए तो सुशांत सिंह की तरह क्यों नहीं मर जाते’

-कार्यवाहक कनिष्ठ लेखाकार ने आयुक्त पर लगाया प्रताडि़त करने का आरोप, बोला: शिकायत करने पर आयुक्त ने कहा ऐसा-आयुक्त बोलीं: आए दिन ठेकेदार करते हैं शिकायत, खुद बना रहा मानसिक दबाव

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अगर प्रताडि़त हो गए तो सुशांत सिंह की तरह क्यों नहीं मर जाते...

अगर प्रताडि़त हो गए तो सुशांत सिंह की तरह क्यों नहीं मर जाते...

भरतपुर. नगर निगम के ही एक कनिष्ठ लेखाकार ने मेयर अभिजीत कुमार को ज्ञापन देकर नगर निगम आयुक्त की ओर से आदेश के विपरीत स्थानांतरण का आरोप लगाते हुए प्रताडि़त करने की शिकायत की है। इतना ही नहीं कनिष्ठ लेखाकार ने यह भी आरोप लगाया है कि जब वह आयुक्त के पास इस संबंध में आयुक्त को पत्र भी दिया गया था। उस समय आयुक्त ने कहा कि अगर आप प्रताडि़त हो रहे हैं तो सुशांत सिंह राजपूत की तरह क्यों नहीं मर जाते। अब इस मामले को लेकर भी नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि अभी इस प्रकरण को लेकर नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी भी बोलने से कतरा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मामला पिछले कुछ दिन से चल रहा था, लेकिन इसकी लिखित में शिकायत नहीं की गई थी। आयुक्त से शिकायत करने के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो अब मेयर के पास प्रकरण की शिकायत की गई है। इतना ही नहीं इस प्रकरण को लेकर एक नहीं बल्कि दो दिन में दो पत्र मेयर को दिए गए हैं। कार्यवाहक कनिष्ठ लेखाकार चंद्रशेखर शर्मा ने पत्र में कहा है कि उन्हें निदेशालय स्वायत्त शासन विभाग राजस्थान जयपुर के आदेश क्रमांक 29 अगस्त 2019 की ओर से कार्यवाहक कनिष्ठ लेखाकार के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया है। नगर निगम आयुक्त ने उक्त आदेश को नजरअंदाज कर कार्यालय आदेश 10 जून 2020 के माध्यम से विधि शाखा में कार्य करने के लिए लगाया गया है। इसमें वरिष्ठता को भी दृष्टिगत नहीं रखा गया है और न ही निदेशालय के आदेशों की परवाह की है। इससे मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ चुका व तनाव ग्रस्त हो चुका हूं।

दूसरे पत्र में यह लिखा...

18 जून की शाम कार्यवाहक कनिष्ठ लेखाकार चंद्रशेखर शर्मा ने ही एक और पत्र मेयर को दिया गया है। इसमें लिखा है कि पूर्व के पत्र की स्थिति अनुसार अवगत कराने के लिए एक पत्र अपनी शाखा विधि शाखा में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर से टाइप कराया। कम्प्यूटर ऑपरेटर ने प्रिंट निकालने के बारे में पूछा तो उससे आवश्यकता पडऩे पर ऐसा करने को कहा। ऑपरेटर ने यह पत्र अपने मोबाइल में लेकर आयुक्त को वाट्सअप पर भेज दिया। इस पत्र में आयुक्त की ओर से प्रताडि़त करने का जिक्र किया था। आयुक्त ने बुलाकर कहा कि अगर मैं प्रताडि़त कर रही हूं तो आप सुशांत सिंह राजपूत की तरह आत्महत्या क्यों नहीं कर लेते। इस कथन को सुनकर मैं सदमे में आ गया हूं। आयुक्त ने कितनी ही बार अपशब्दों का प्रयोग मेरे लिए किया गया है। वो सारे प्रमाण मोबाइल फोन में उपलब्ध है।

-दो पत्र कार्यवाहक कनिष्ठ लेखाकार ने दिए हैं। कार्यालय से जाते समय एक पत्र दिया था। इसमें आरोप है कि जब उन्होंने प्रकरण की शिकायत आयुक्त से की तो उन्होंने कहा कि प्रताडि़त हैं तो सुशांत सिंह की तरह क्यों नहीं मर जाते। यह आरोप है। नगर निगम के सभी अधिकारी-कर्मचारी एक परिवार की तरह है। प्रकरण की जांच कराई जाएगी। कर्मचारी अच्छी तरह से समझा दिया है कि उनके साथ अगर गलत हुआ है तो अन्याय नहीं होगा। सोमवार को इस पत्र का अध्ययन कर आयुक्त से बात की जाएगी।

अभिजीत कुमार
मेयर नगर निगम

-हमने स्वायत्त शासन विभाग को पत्र भेज दिया है। वह उस पद के अनुसार अनुभव ही नहीं रखते हैं। ठेकेदारों की ओर से लगातार उनकी भ्रष्टाचार की शिकायत आती रहती हैं। ऐसी शिकायतों के कारण व अनुभव कनिष्ठ लेखाकार का कोई अनुभव नहीं होने के कारण उनसे यह कार्य कराना नामुमकिन है। कैंसर से पीडि़त मनोज के कारण उन्हें विधि शाखा में लगाया है। खुद उक्त कर्मचारी सीएसआई बनने के लिए मानसिक दबाव बना रहा है। इसके प्रमाण मेरे पास भी उपलब्ध है। यह सब दबाव बनाने के लिए किया गया है। हमने नियम अनुसार ही उन्हें कार्य दिया है।

नीलिमा तक्षक
आयुक्त नगर निगम