
अंग्रेजी में किसानों से करार करके बीज कंपनी ने दिया बड़ा धोखा, 12 सौ एकड़ में नर-नारी धान की फसल चौपट, कृषि वैज्ञानिकों की जांच में खुलासा,अंग्रेजी में किसानों से करार करके बीज कंपनी ने दिया बड़ा धोखा, 12 सौ एकड़ में नर-नारी धान की फसल चौपट, कृषि वैज्ञानिकों की जांच में खुलासा,अंग्रेजी में किसानों से करार करके बीज कंपनी ने दिया बड़ा धोखा, 12 सौ एकड़ में नर-नारी धान की फसल चौपट, कृषि वैज्ञानिकों की जांच में खुलासा
बीरेंद्र शर्मा @भिलाई. नर-नारी धान से किसानों को हुए नुकसान का जायजा लेने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर (Indira Gandhi Agricultural University) के कृषि वैज्ञानिकों (Agricultural Scientist ) की तीन सदस्यीय जांच टीम सोमवार को धमधा ब्लॉक के गांवों में पहुंची। वैज्ञानिक यह देखकर हैरान रह गए कि बीज उत्पादन करने वाली कंपनी क्षेत्र की जलवायु की अनुकुलता परखे ही इतनी बड़ी संख्या में किसानोंं से इस किस्म के धान की खेती करवाई। इतना ही नहीं समय पर जरूरी दवाइयां डलवाने में भी चूक की। और तो गांव के कम पढ़े- लिखे किसानों से करार भी अंग्रेजी में किया है। उन्हें इसकी प्रति भी नहीं दी है। विशेषज्ञों ने ऐसी कई खामियां गिनाते हुए किसानों को क्षतिपूर्ति देने की नसीहत कंपनी के उपस्थित अधिकारियों को दी।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया पैदावर शून्य
दल में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के प्रमुख वैज्ञानिक हाइब्रिड राइस परियोजना डॉ. दीपक शर्मा, प्रमुख वैज्ञानिक राष्ट्रीय बीज परियोजना डॉ. पीके चंद्राकर व डॉ. एनके रस्तोगी शामिल थे। टीम सबसे पहले सुबह 10.30 बजे ग्राम डोड़की के जीवन लाल वर्मा के खेत पहुंची। वर्मा ने 30 एकड़ में हाइब्रिड धान नर-नारी की खेती की है। खेत में फसल की बालियों को देखा और पैदावार को शून्य बताया। मौके पर मौजूद कंपनी के एरिया मैनेजर ने फोन का स्पीकर चालू कर अपने जोनल मैनेजर मसूद इकबाल से बात कराई। जांच टीम के डॉ. शर्मा ने जोनल मैनेजर से किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से तत्काल मुआवजा देने कहा। साथ ही जो फसल अभी खड़ी है उसकी कटाई करने कहा। इस मौके पर दुर्ग कृषि संयुक्त संचालक आरके राठौर, कृषि उपसंचालक एसएस राजपूत और धमधा ब्लॉक के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एनडी लिलारे के साथ बायर सीड प्रोडक्शन कंपनी के एरिया मैनेजर अमित देशमुख और नर-नारी धन की खेती करने वाले आस-पास के किसान उपस्थित रहे।
कंपनी की पांच बड़ी लापरवाही जिससे किसान हो रहे हलाकान
1. जलवायु के अनुसार बीज का चयन नहीं किया।
हाइब्रिड एक्सपर्ट ने कंपनी के जोनल मैनेजर से सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर खेती करवा रहे हैं, हाइब्रिड फसल के लिए क्षेत्र की जलवायु की अनुकूलता की जांच करवाई है क्या? जोनल मैनेजर के इनकार करने से टीम हैरान रह गई। कहा कि यह किसानों के साथ बहुत गलत हुआ है। कंपनी ने जलवायु के अनुसार बीज का चयन नहीं किया। इसलिए धान में बीज पैदावार नहीं हुई।
2. दवा का प्रॉपर छिड़काव नहीं किया
कृषि वैज्ञानिक डॉ. पीके चंद्राकर ने बताया कि हाइब्रिड फसल में जैब्रेलिक एसीड दवा डालना पड़ता है। इससे धान की बाली ऊपर आ जाती है। कंपनी ने प्रॉपर डोज में इस दवा का छिड़काव नहीं किया है। या फिर कंपनी ने फर्जी दवा उपलब्ध कराई। इसलिए बालियां तो अच्छी निकली लेकिन धान के दाने नहीं पड़े।
3. वेरायटी के बारे में कंपनी को जानकारी नहीं
कृषि विशेषज्ञों के दल ने कहा कि धान की वेरायटी के बारे में कंपनी को जानकारी नहीं है। 1200 एकड़ में सीड उत्पादन की प्रोग्रामिंग शुरु कर दी, लेकिन धमधा क्षेत्र का वातावरण नर-नारी धान 315 के उत्पादन के अनुरूप है या नहीं, इसकी जांच ही नहीं की गई।
4. किसानों को करार का कागजात भी नहीं दिया
कंपनी ने किसानों से 6 पन्ने के कागज में बीज उत्पादन करने का करार किया है। इसमें सभी शर्तें अंग्रेजी भाषा में लिखी हुई है, जो किसानों की समझ से बाहर है। किसानों ने कहा कि कंपनी के एजेंट ने शर्तें जुबानी समझाई और जहां-जहां दस्तखत करने कहा कर दिया। एग्रीमेंट की कॉपी भी आज तक किसानों को नहीं दी गई है।
5. कृषि विभाग को कोई जानकारी नहीं दी
मौके पर मौजूद दुर्ग कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने इतने बड़े पैमाने पर हाइब्रिड धान की खेती करवाई है, लेकिन विभाग को कोई जानकारी नहीं दी। जबकि कंपनी को कृषि अधिकारियों के समक्ष किसानों के साथ अनुबंध करना था। यह कंपनी की बड़ी लापरवाही है।
जांच टीम के सामने यंू छलका किसानों का दर्द
1. किसान मुरली वर्मा ने बताया कि 10 एकड़ में खेती किया है। कंपनी ने इस बार नया बीज से नर-नारी धान की खेती कराई है। कंपनी ने अपने प्रयोग के चक्कर में हम किसानों का नुकसान कर दिया है। पिछली साल 8 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार हुआ था।
2. किसान संजय वर्मा ने बताया कि साढ़े सात एकड़ में नर-नारी धान की खेती की है। उसके खेत की पूरी फसल तबाह हो गई। कम से कम 6 क्विंटल तक पैदावार हो जाती तो भी सुकुन था। कंपनी कटाई तक का पैसा काट लेती है।
3. किसान अगेन वर्मा ने बताया कि 3 एकड़ में खेती की है। कंपनी ने 14 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन का वादा किया था। यह भी कहा था कि उससे कम पैदावार हुई तो कंपनी मुआवजा देगी, लेकिन एग्रीमेंट की कॉपी आज तक नहीं दी है।
किसानों के साथ बैठकर तय करेंगे मुआवजा
बायर सीड प्रोडक्शन कंपनी के एरिया मैनेजर सतीश देशमुख ने बताया कि कंपनी के जोनल मैनेजर मसूद इकबाल को पूरी जानकारी दे दी गई है। जांच करने आए कृषि वैज्ञानिकों से उनकी बात भी करवा दिया हूं। कंपनी किसानों को मुआवजा देगी। दो दिन के अंदर कंपनी के जोनल मैनेजर आ रहे हैं। मुआवजा की राशि तय करने किसानों के साथ बैठक कर चर्चा करेंगे।
नए बीज के प्रयोग से खेती चौपट
डॉ. पीके चंद्राकर, प्रमुख वैज्ञानिक राष्ट्रीय बीज परियोजना इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय रायपुर ने कहा कि पत्रिका समाचार पत्र से इसकी जानकारी मिली है। शासन के आदेश पर जांच करने आए हैं। जलवायु का बिना परीक्षण किए कंपनी ने 253 किसानों से 1200 एकड़ में खेती कराई है। इस क्षेत्र के लिए नया बीज का कंपनी ने प्रयोग किया। जिसके कारण खेती चौपट हो गई। कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। किसानों से अंग्रेजी भाषा में एग्रीमेंट कराया है। उसकी एक भी कॉपी किसानों को मुहैया नहीं कराई गई है।
Published on:
25 May 2021 01:39 pm
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