भिलाई

COVID-19 होम आइसोलेशन में एक और कोरोना संक्रमित मरीज की मौत

जिला प्रशासन के दावों की खुल रही पोल.  

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Nov 22, 2020
COVID-19 होम आइसोलेशन में एक और कोरोना संक्रमित मरीज की मौत

भिलाई. जामुल में रहने वाले 74 साल के बुजुर्ग ने शुक्रवार व शनिवार के दरमियानी रात घर पर ही दम तोड़ दिया। वे कोविड-19 से संक्रमित थे। होम आइसोलेशन के तहत उनका घर पर ही उपचार जारी था। इसके पहले भी अहिवारा में रहने वाले एक व्यक्ति की होम आइसोलेशन के दौरान मौत हो गई थी। होम आइसोलेशन में होने वाली मौत जिला प्रशासन के कई दावों की पोल खोल रही है। कोविड से जिला में अब तक करीब 503 संक्रमितों की मौत हो चुकी है, जो राजधानी के बाद किसी भी जिले में होने वाली कोरोना मरीज की सबसे अधिक है।

परिजनों ने की सारी व्यवस्था
जामुल में रहने वाले बुजुर्ग की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव थी, उनको 17 नवंबर 2020 से होम आइसोलेशन में रखा गया था। मरीज की 19 नवंबर 2020 को आरटीपीसीआर जांच भी पॉजिविट रही थी। होम आइसोलेशन में परिजनों ने ऑक्सीजन समेत तमाम व्यवस्था कर रखी थी। मरीज को दवा भी नियमित दिया जा रहा था। शुक्रवार व शनिवार के दरमियानी रात में तबीयत बिगड़ी तब आनन-फानन में 108 एबुंलेंस से अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सक ने उन्हें ब्रॉड डेथ घोषित किया।

दम तोड़ रहे दावे
जिला प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि होम आइसोलेशन में मरीजों पर लगातार नजर रखा जा रहा है। उनके स्वास्थ्य की जानकारी फोन कर हर दिन कम से कम दो बार ली जा रही है। वहीं तबीयत बिगडऩे पर मरीज को तुरंत चंद मिनटों में हॉस्पिटल तक पहुंचाने की व्यवस्था भी किया जा रहा है। ऐसे में एक व्यक्ति की होम आइसोलेशन में मौत होना, जिला प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है।

हकीकत
होम आइसोलेशन में यह दूसरी मौत है, इसके पहले अहिवारा के एक ४५ साल के व्यक्ति ने होम आइसोलेशन में रहते हुए दम तोड़ा था। अब एक बुजुर्ग की जान चली गई। सरकारी कोविड केयर सेंटर में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से जिला प्रशासन ने शुरू से ही होम आइसोलेशन पर बल दिया है। अब इसका साइड इफेक्ट भी नजर आने लगा है।

उठ रहे सवाल
कोरोना पॉजिटिव आने पर बुजुर्गों को होम आइसोलेशन में रखना कहां तक सुरक्षित है। यह सवाल उठ रहे हैं। कोविड केयर सेंटर में बुजुर्गों को रखने की जरूरत है साथ ही वहां केयर करने के लिए स्टाफ की तमाम व्यवस्था भी रहे। जिससे इस तरह से किसी बुजुर्ग की जान न चली जाए। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को होम आइसोलेशन में रखा जाता है तो कम से कम दो दिनों में एक बार चिकित्सक घर जाकर मरीज की स्थिति की जानकारी परिवार से ले। इससे मरीज को समय रहते अस्पताल में शिफ्ट किया जा सकता है।

मरीज अधिक हो गए तो अपना लिया होम आइसोलेशन को
कोरोना महामारी जिस वक्त शुरू हुआ था, तब जिला प्रशासन ने घर-घर से पॉजिटिव मरीजों को पकड़कर कोविड सेंटर तक पहुंचाया। इसके लिए पुलिस का सहारा तक लिया गया। जब मरीज अधिक हो गए और व्यवस्था कम पडऩे लगी, तब होम आइसोलेशन का रुख कर लिया। असल में होम आइसोलेशन में जिनको रहने सलाह दी जा रही है, उनको घर में कम से कम ऑक्सीजन की व्यवस्था करने और उसका उपयोग किस तरह से किया जाना है। वह बताने के साथ-साथ लगातार जिला अस्पताल के कंट्रोल रूम से संपर्क बनाए रखने कहना जरूरी है।

Published on:
22 Nov 2020 12:02 pm
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