
पुरुषों के खेल बॉडी बिल्डिंग में भिलाई की युवती ने देशभर में कमाया नाम
भिलाई. बॉडी बिल्डिंग आम तौर पर पुरुषों का खेल है। इस खेल मेे जाने का आम घरों में युवतियों को इजाजत तक नहीं दी जाती। सुप्रीति आचार्जी ने महज 15 साल की उम्र में इस प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया। वहां मालूम पड़ा कि इसके लिए किस तरह की डाइट चाहिए, वर्क आउट कैसे करना है। घर की माली हालत इसकी इजाजत नहीं दे रही थी, लेकिन इस शौक को पूरा करने उसने मन बना लिया। तय किया कि घर वालों पर बिना बोझ बने, अपने खेल को जारी रखा जाएगा। युवती चाहती है कि उसे सरकारी नौकरी इस खेल के एवज में मिले, जिससे वह अपने परिवार का भरनपोषण कर सके।
विश्व स्तर पर चयन होने के बाद भी नहीं जा सकी खेलने
आचार्जी ने बताया कि विश्व स्तर की बॉडी बिल्डिंग स्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए 2022 में इंदौर जाकर तैयारी शुरू की। वहां तैयारी पूरी करने के बाद सिलिगुड़ी के लिए रवाना हुए। ट्रेन छूटने की वजह से अगल-अलग ट्रेन से होकर किसी तरह रात 3 बजे सिलिगुड़ी पहुंचे। अगले दिन स्पर्धा थी। बेहतर प्रदर्शन किया। देश के 30 खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया, इसमें दूसरा स्थान हासिल किया। विश्व स्तर की स्पर्धा के लिए चयन हो गया, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से वहां जा नहीं सकी।
क्रिकेट जैसा नहीं मिलता तवज्जो
उन्होंने बताया कि बॉडी बिल्डिंग में क्रिकेट जैसा तवज्जो नहीं मिलता। यही वजह है कि इस खेल में आगे बढऩे के लिए परिवार का सपोट अधिक चाहिए होता है। आर्थिक हालात मजबूत है, तब इस खेल में आगे बढऩे की उम्मीद होती है। वर्ना जूझना अधिक पड़ता है।
कैश प्राइज वाले कम्पटीशन में लिया हिस्सा
उन्होंने बताया कि कैश प्राइज वाले कम्पटीशन में हिस्सा लेने दिल्ली रवाना हुई। वहां देशभर से टॉप के खिलाड़ी पहुंचे थे। वहां 25 से अधिक खिलाडिय़ों को पीछे छोड़ प्रतिस्पर्धा जीत ली। इसके लिए 2.5 लाख रुपए का नकद पुरस्कार मिला। तब उम्र सिर्फ 19 साल थी। कोच यश ठाकुर के साथ मध्य प्रदेश में एक जिम शुरू किया है। अब फोकस इस पर ही है। इसके साथ-साथ खुद भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए वर्क आउट किया जा रहा है। नए खिलाडिय़ों को ट्रेनिंग भी दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ दुर्ग कॉलज में शिक्षा हासिल कर रही हैं।
जोनल लेवल पर रही दूसरे स्थान
नागपुर में जोनल लेवल की बॉडी बिल्डिंग की स्पर्धा हुई। इसमें दूसरे स्थान पर रही। तब उम्र सिर्फ 15 साल थी। यहां पर जाना कि किस तरह से तैयारी करना होता है। तय किया कि अब और बेहतर तैयारी कर मंच में उतरा जाएगा।
बॉडी बिल्डिंग स्पर्धा में हिस्सा लेना आसान नहीं
उन्होंने बताया कि बॉडी बिल्डिंग के लिए जो डाइट चाहिए, वह भी खासी महंगी होती है। पिता एचएससीएल से रिटायर्ड होने की वजह से घर की माली हालत इसकी इजाजत नहीं देती थी। तब तय किया कि खुद से ही कमा कर इस खेल के शौक को पूरा किया जाएगा।
जिम में देने लगी प्रशिक्षण
जिम में आने वालों को ट्रेनिंग देने का काम शुरू किया। इस तरह से परिवार वालों पर बोझ नहीं बनी। ट्रेनिंग देने के साथ-साथ अपना वर्क आउट भी जारी रखा। इससे होने वाली प्रतिस्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
Published on:
04 Apr 2023 09:08 pm
बड़ी खबरें
View Allभिलाई
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
