
Breaking: लंबे अरसे बाद BSP को लेबर सप्लाई करने वाले HSCL को अनुबंध पर नहीं स्थाई मिलेगा मुखिया
भिलाई. एचएससीएल को करीब 6 साल बाद नियमित अधिकारी (मुखिया ) मिलने जा रहा है। पिछले 6 साल से लगातार यहां की कमान अनुबंध के आधार पर अस्थाई अधिकारी को दी जाती रही है।
इससे उस अफसर पर उच्चाधिकारियों व स्थानीय कर्मचारियों का दबाव रहता था। वह कोई बड़े फैसले लेने से पहले ऊपर के अधिकारियों से कोलकाता जाकर अनुमति लेता था। यह दिक्कत नियमित अफसर आने के बाद खत्म हो जाएगी।
एचएससीएल में पिछले 6 वर्षो में जितने भी आंदोलन हुए वह चाहे कर्मचारी के हों या ठेकेदरों के सभी में यहां के मुखिया लाचार दिखे। अब केंद्र सरकार ने रिटायर्ड अधिकारियों को और एक्सटेंशन देने से मना कर दिया है। जिससे एचएससीएल प्रबंधन को नियमित अधिकारी मिलेगा।
एचएससीएल में कुछ बीएसपी से रिटायर्ड अफसर भी काम कर रहे हैं। उनके स्थान पर भी नए युवा इंजीनियरों की भर्ती हो तो यहां के काम की क्वालिटी में बड़ा सुधार आएगा।
माह के आखिर तक मिल सकते हैं मुखिया
कयास लगाए जा रहे हंै कि मई के अंत या जून 2018 तक एचएससीएल के चेयरमैन व कार्यपालक अधिकारी को बदल दिए जाएंगे। जो एचएससीएल के लिए अच्छे संकेत है। यूनियन नेता उज्जवल दत्ता ने बताया कि नियमित अधिकारी मनोज सिंह को महाप्रबंधक बना कर एचएससीएल का मुखिया बनाया जा सकता है। इनकी अभी 3 साल नौकरी शेष है ।
पुराने कार्यपालक ए लहरी का कार्यकाल अच्छा रहा। उन्होंने कठिन परिस्थिति में भी आखिर पीआरडब्ल्यू भिलाई इस्पात संयंत्र में सप्लाई का काम व ठेका श्रमिकों का 5 लाख का दुर्घटना बीमाा करवाया। भारत में पहली संस्था ने इस प्रकार का कदम उठाया। जिसका लाभ दुर्घटना में मृत ठेका श्रमिकों के आश्रित को मिलने लगा है।
अब होगी जिम्मेदारी तय
एचएससीएल के मुखिया नियमित अधिकारी बनाए जाने पर अब काम या अनियमितता की अब जिमेदारी तय होगी। पूर्व में एक्सटेंशन में रिटायर कर्मी मुखिया होते थे। इस कारण किसी भी प्रकरण में जिम्मेदारी तय नहीं हो पाता था। मुखिया ही अस्थाई होता था इस कारण कोई कार्रवाई भी नहीं हो पता था। स्थाई मुखिया आने के बाद अब जिमेदारी तय की जा सकती है।
Published on:
23 May 2018 01:00 pm
