1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जापान को पछाड़कर भारत कच्चा इस्पात उत्पादन करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश, छंटने गली मंदी की काली छाया

भारत 2017 में कच्चे इस्पात के उत्पादन में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश था जो जनवरी से अक्टूबर 2018 की अवधि में जापान को पछाड़कर विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है।

2 min read
Google source verification

भिलाई

image

Dakshi Sahu

Dec 26, 2018

patrika

जापान को पछाड़कर भारत कच्चा इस्पात उत्पादन करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश, छंटने गली मंदी की काली छाया

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। न केवल अब विश्व इस्पात बाजार से मंदी की काली छाया छंटने लगी है, बल्कि स्थिति दिनोंदिन बेहतर होती जा रही है। भारत 2017 में कच्चे इस्पात के उत्पादन में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश था जो जनवरी से अक्टूबर 2018 की अवधि में जापान को पछाड़कर विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है।

दुनिया में पहले नंबर पर चीन
782.5 मिलियन टन उत्पादन के साथ चीन अभी भी दुनिया में पहले नंबर पर है। 2017-18 के दौरान देश में कच्चे इस्पात उत्पादन की क्षमता 137.9 75 मिलियन टन थी जबकि उत्पादन 103.13 मिलियन टन हुआ था। इस साल के दस महीने में 88.4 मिलियन टन उत्पादन कर भारत दूसरे नंबर पर आ गया है। जापान 87.2 और अमेरिका ने 71.7 मिलियन टन का इस्पात उत्पादन अभी तक किया है।

इस्पात की खपत बढ़ी
राष्ट्रीय इस्पात नीति और घरेलू रूप से निर्मित आयरन एंड स्टील उत्पाद नीति से इस्पात के उत्पादन और खपत दोनों में भारी में वृद्धि हुई है। इस्पात की प्रति व्यक्ति खपत 2013-14 में 59 किलोग्राम से बढ़कर 2017-18 में 69 किलोग्राम हो गई है। हालांकि खपत के मामले में भारत अभी भी चीन व अमेरिका के बाद तीसरे नंबर पर है।

भारत सरकार का बुनियादी ढांचों के निर्माण पर जोर और प्रतिबद्धता, मेक-इन-इंडिया और स्मार्ट सिटी अभियान से इस्पात की खपत बढ़ी है। अभी आगे और उम्मीद 100 स्मार्ट सिटीज मिशन, सभी के लिए आवास मिशन, कायाकल्प और शहरी रूपांतरण के लिए अटल मिशन, हाई स्पीड बुलेट ट्रेन और मेट्रो ट्रेन जैसे प्रमुख कार्यक्रम देश में इस्पात के मांग की बढ़ोतरी में और बहुत सहयोग देंगे।

२०३१ तक लक्ष्य ३०० मिलियन टन का
राष्ट्रीय इस्पात नीति- 2017 की परिकल्पना के अनुसार वर्तमान समय मे देश की स्टील उत्पादन क्षमता 137 मीट्रिक टन को 2030-31 तक बढ़ाकर 300 मिलियन टन (एमटी) करना है। इस क्षमता तक पहुंचने के लिए संयंत्र और उपकरणों के आयात की अनुमानित लागत 25 अरब अमेरिकी डॉलर होगी। इसके अलावा, यह अनुमान लगाया गया है कि 300 एमटी क्षमता स्तर तक पहुंचने के लिए, भारत को स्वामित्व और अन्य चीजों के आयात के लिए सालाना 500 मिलियन अमरीकी डालर खर्च करना पड़ेगा।

लंबित निपटाए जाएंगे
विश्व इस्पात बाजार में मंदी के चलते स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की स्थिति खराब हो गई है। लगातार तीन साल से घाटे मे होने के कारण अधिकारियों व कर्मचारियों को वेतन समझौता अटक गया है। मंजूरी के बाद भाी पेंशन योजना को लागू नहीं कर पा रहे हैं। कर्मियों को मिलने वाले विभिन्न भत्ते, प्रोत्साहन राशि, अग्रिम भुगतान आदि पर रोक लगा दी गई है। सुविधाओं में भी लगातार कटौती जारी है। इस्पात की खपत बढऩे से सेल व बीएसपी के उत्पाद की डिमांड बढ़ेगी। कंपनी की स्थिति सुधरने से सभी सुविधाएं बहाल होने व देयकों से संबंधित लंबित मामले निपटाए जाएंगे।

Story Loader