4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बीएसपी के डिप्लोमा इंजीनियरों ने कहा- सीएसवीटीयू में शुरू हो मेटलर्जी का डिग्री कोर्स

लाई इस्पात संयंत्र के डिप्लोमा इंजीनियर्स सहित छात्रों की मांग है कि छत्तीसगढ़ की अग्रणी छग स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयु) में मेटलर्जी ब्रांच शुरू हो। यहां अब तक मेटलर्जी ब्रांच खोला नहीं जा सका है। जबकि भिलाई में एशिया का सबसे बड़ा लौह कारखाना भिलाई इस्पात संयंत्र प्रचालन में है। इससे पढ़ाई के दौरान छात्रों को न केवल अच्छी वोकेशनल ट्रेनिंग मिल सकती है, बल्कि ऐसे छात्रों के सहयोग से प्लांट सहित अन्य उद्योगों को भी अपनी दक्षता बढ़ाने व अनुसंधान में सहायता मिलती।

2 min read
Google source verification

भिलाई

image

Nirmal Sahu

Apr 11, 2022

बीएसपी के डिप्लोमा इंजीनियरों ने कहा- सीएसवीटीयू में शुरू हो मेटलर्जी का डिग्री कोर्स

बीएसपी के डिप्लोमा इंजीनियरों ने कहा- सीएसवीटीयू में शुरू हो मेटलर्जी का डिग्री कोर्स

Bhilai भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र के डिप्लोमा इंजीनियर्स सहित छात्रों की मांग है कि छत्तीसगढ़ की अग्रणी छग स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयु) में मेटलर्जी ब्रांच शुरू हो। यहां अब तक मेटलर्जी ब्रांच खोला नहीं जा सका है। जबकि भिलाई में एशिया का सबसे बड़ा लौह कारखाना भिलाई इस्पात संयंत्र प्रचालन में है। इससे पढ़ाई के दौरान छात्रों को न केवल अच्छी वोकेशनल ट्रेनिंग मिल सकती है, बल्कि ऐसे छात्रों के सहयोग से प्लांट सहित अन्य उद्योगों को भी अपनी दक्षता बढ़ाने व अनुसंधान में सहायता मिलती।

इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेजों के सैकड़ों छात्र जो आगे ग्रेजुएशन करना चाहते है, वो भी अपनी आगे की पढ़ाई बिना दूसरे राज्यों में भटके जारी रख सकते हंै। साथ ही पार्ट टाइम ग्रेजुएशन चालू होने से संयंत्र में कार्यरत कर्मियों को भी अपनी तकनीकी व शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने का मौका मिल जाएगा जो कि वर्तमान समय में बहुत जरूरी है। सीएसवीटीय में मेटलर्जी ब्रांच नहीं होने से छात्रों को ग्रेजुएशन करने या तो प्राइवेट यूनिवर्सिटी का रुख करना पड़ता है या दूसरे राज्यों में भटकना पड़ता है।
अब कहां जाए छात्र-----
डिस्टेंस कोर्स बंद, रायपुर जीईसी
में भी मेटलर्जी की क्लास नहीं
ज्ञात हो कि 2014 के बाद से इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेटल्स (कोलकाता) से डिस्टेंस माध्यम से मेटलर्जी ब्रांच में ग्रेजुएशन कराया जा रहा था, लेकिन तकनीकी मंत्रालय द्वारा उसकी मान्यता खत्म कर दी गई है। इससे हज़ारों छात्रों का जो पॉलिटेक्निक के बाद कार्य करते हुए ग्रेजुएशन करना चाहते थे उनका सपना टूट गया है। छत्तीसगढ़ में एनआईटी की स्थापना के पूर्व गवर्नमेंंटकॉलेज रायपुर में मेटलर्जी की क्लासेज लगती थी परंतु जीईसी कॉलेज कैंपस के एनआईटी बन जाने के बाद नए जीईसी कॉलेज में अन्य ब्रांचेस तो चालू कर दी गई पर मेटलर्जी की क्लासेज अब तक बंद है।
मेटलर्जी ब्रांच शुरू होने से-
छात्रों को फायदा
प्राइवेट यूनिवर्सिटी को भारी भरकम फीस नही चुकाना पड़ेगा। कमजोर आर्थिक वर्ग के बच्चे भी यह पढ़ाई कर सकेंगे। अपने ही राज्य में ही पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिलने से आर्थिक बचत तो होगी ही, पढ़ाई में सहुलियत भी।
यूनिवर्सिटी को लाभ
अच्छे पाठ्यक्रम के डिज़ाइन द्वारा गुणवत्तापूर्ण छात्रों का निर्माण जो अनुसंधान व विकास में सहायता कर पाएंगे। छात्रों के प्रवेश से कॉलेज व यूनिवर्सिटी को होने फाइनेंसियल आस्पेक्ट्स।
लौह कारखानों के लिए दक्ष मैनपॉवर की पूर्ति हो सकेगी
डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के मोहम्मद रफी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में उच्च ग्रेड के आयरन ओर से लेकर कोयला आदि के भंडार हंै जो यहां के उद्योगों को पोषित करते हैं। उद्योगों को चलाने व्यापक तौर पर क्षमतावान इंजीनियर्स व स्किल मैन पॉवर की आवश्यकता होती है। राज्य सरकार ने इसे ध्यान में रखकर डिग्री व पॉलिटेक्निक कॉलेजों की भी स्थापना की है। इन संस्थानों में अलग-अलग ब्रांचों में इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक की पढ़ाई हो रही है, लेकिन मेटलर्जी ब्रांच जिससे पास इंजीनियर धातु परिष्करण उद्योगों जैसे कि लौह कारखाने, पैलेट प्लांट के साथ मिश्र धातु उद्योगों की जान होते हंैं, अब तक इसकी पढ़ाई शुरू नहीं की जा सकी है।