
टर्म एम्प्लॉयमेंट से ठेका श्रमिकों का शोषण होगा खत्म , न्यूनतम वेतनमान का भी झंझट नहीं रहेगा
भिलाई . भिलाई इस्पात संयंत्र के फैक्ट्रियों में चाहे जिस नेचर का काम हो, उसे ठेका मजदूरों से करवाया जा रहा है। निजी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से कॉस्ट कटौती करने प्रबंधन यह पैतरे अजमा रहा है। इन सब के बीच ठेका मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने की शिकायत बढ़ती जा रही है। प्रबंधन को बार-बार सेंट्रल रीजनल लेबर कमिश्रर के सामने सफाई देनी पड़ती है। बीएसपी अब इन विवादों से ऊपर उठने की तैयारी कर रही है।
प्रबंधन अब नगरनार इस्पात संयंत्र पर नजर रखा है, जहां टर्म एम्प्लॉयमेंट से नियुक्ति की जा रही है। वहां ठेका मजदूरों को टर्म एम्प्लॉयमेंट के तहत रखकर, अगर काम सरलता से करवाया जाता है, तो उस राह में बीएसपी भी आगे बढ़ेगा।
श्रम कानून के मुताबिक टर्म एम्प्लॉयमेंट के जरिए कर्मियों को २ से ३ साल तक संविदा नियुक्ति पर रखने का प्रावधान होता है। बेहतर काम करने वालों को आगे भी रखा जा सकता है। वर्ना हटाया भी जा सकता है। प्रबंधन मंथन कर रहा है कि ठेका मजदूरों को अगर टर्म एम्प्लॉयमेंट के जरिए संविदा नियुक्ति दी जाती है, तब इन कर्मियों को सीधे उनके खाते में भुगतान की व्यवस्था होगी। दूसरे विवाद खत्म हो जाएंगे।
धीरे-धीरे हर काम ठेका मजदूरों के हाथ
बीएसपी में ठेका मजदूरों को शुरू में सफाई व कर्मियों के सहायक के तौर पर रखा जा रहा था। धीरे-धीरे अब ऑपरेशन से लेकर मेंटनेंस तक का काम ठेका मजदूरों से करवाया जा रहा है। ठेकेदार बदल भी जाता है, तब भी अनुभव अधिक होने की वजह से उस मजदूर से ही काम लिया जाता है।
दो-दो माह का नहीं मिलता वेतन
बीएसपी में ठेका श्रमिकों को समय पर वेतन नहीं मिलता। इस समस्या की मुख्य वजह प्रबंधन का ठेका मजदूरों का वेतन कांट्रेक्टर के माध्यम से देना होता है। इस सिस्टम में ठेकेदार अक्सर हेर-फेर कर मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं देते हैं, जिसके चलते बीएसपी में ठेका मजदूरों का धरना-प्रदर्शन आए दिन आईआर विभाग के सामने चलता रहता है।
बढ़ेगी जिम्मेदारी और काम की गुणवत्ता
बीएसपी में पीआरडब्ल्यू सिस्टम को हटाकर टर्म एम्प्लॉयमेंट के माध्यम से नियुक्ति की जाती है, तो ठेका मजदूरों की जिम्मेदारी बढ़ेगी। काम की गुणवत्ता में सुधार होगा। मजदूरों को अधिक रकम मिलने से जीवन स्तर में सुधार आएगा।
लेबर सप्लाई सिस्टम श्रमिकों के शोषण की मुख्य वजह
बीएसपी को एचएससीएल से ठेकेदार मजदूर सप्लाई करते हैं। वहां से करीब ६००० से अधिक मजदूर भेजे जाते हैं। जिसकी संख्या में कटौती होती जा रही है। इन मजदूरों के नाम पर प्रबंधन जो राशि वेतन, एडब्ल्यूए की देता है, उसे पहले एचएससीएल के खाता में भेजते हैं। इसके बाद कुछ फीसदी कटौती कर राशि को ठेकेदार के खाता में डाला जाता है। ठेकेदार इसके बाद न्यूनतम भुगतान भी मजदूरों को नहीं करता। शिकायत है कि मजदूरों का यहां शोषण किया जाता है।
उठ रही बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की मांग
बीएसपी में ठेका मजदूर हमेशा से ही शिकायत करते आ रहे हैं कि वे जितने दिन काम करते हैं, ठेकेदार उस हाजिरी को कम कर देता है। जिससे उनको दूसरे आर्थिक लाभ नहीं मिल पाते। अक्सर मजदूरों का १५ दिन का अटेंडेंस मिलता है। जिससे निजात पाने के लिए ठेका मजदूर बायोमैट्रिक मशीन लगाने की मांग कर रहे हैं। बायोमैट्रिक लगा देने से उनके हर दिन की उपस्थिति कम्प्यूटर में दर्ज हो जाएगी। वर्तमान में पूरे माह काम करने के बाद भी मजदूरों के वेतन में कटौती कर दी जाती है।
Published on:
22 Aug 2019 12:17 am
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