
CG News: डीएनए रिपोर्ट मिलने के बाद जिला अस्पताल में जन्में दो नवजात शिशुओं को उनके असली माता-पिता को सौंप दिया गया है। तीन दिन में रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि साधना को सौंपा गया बच्चा शबाना का और शबाना को सौंपा गया बच्चा साधना का है।
बालक कल्याण समिति द्वारा दोनों परिवार को बुलाया गया। देर शाम 7.30 बजे दोनों परिवार बालक कल्याण समिति के कार्यालय पहुंचे। जहां अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे लंबी बातचीत चली। सिल्वर लिफाफे में रिपोर्ट आई थी। नियमानुसार बच्चा सौंपने की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके पहले ही शबाना के भाई ने घंटेभर में बाहर निकलकर खुशी से अपने परिवार वालों को बच्चा मिलने की खुशखबरी दी। कहा, बच्चा दिया जा रहा है। सीडब्ल्यूसी के सदस्य, सीएचएमओ, सीएस शामिल थे।
दोनों परिवार के बाहर निकलते ही सभी खुश नजर आ रहे थे। शबाना खुशी से रोते हुए अपनी मां से गले लगी। बच्चे को सीने से लगाया। इनके पति अल्ताफ ने कहा कि हम बहुत खुश हैं। हमारा खून हमारे पास आ गया। दूसरी ओर साधना भी खुश नजर आ रही थी। उसने कहा कि मेरा बच्चा मेरे पास है, मैं बहुत खुश हूं। डीएनए टेस्ट नहीं हुआ था तो कैसे मान लेती कि वह मेरा बच्चा है। पर अब सब स्पष्ट है।
जिला अस्पताल में 23 जनवरी को साधना सिंह और शबाना कुरैशी की डिलीवरी हुई थी। दोनों ने पुत्र को जन्म दिया। बच्चा सौंपने के समय लापरवाही के कारण शबाना का बच्चा साधना को और साधना का बच्चा शबाना को सौंप दिया गया। शबाना टांका खुलवाने अस्पताल पहुंची तो बच्चे के हाथ में लगे टैग में साधना लिखा देखा।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा अब तक किसी के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कलेक्टर द्वारा दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया। जांच टीम में डॉ. अर्चना चौहान और कलेक्ट्रेट से भार्गव शामिल है। सीएस डॉ. हेमंत कुमार साहू का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा की गलती किसकी है। उसके बाद र्कावाई की जाएगी।
सीएचएमओ डॉ. मनोज दानी, बाल कल्याण समिति ने बच्चों को उनके असली माता पिता को सौपने की कार्रवाई की। सीलबंद रिपोर्ट दोनों परिवार के सामने प्रस्तुत किया गया। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। दोनों परिवार रिपोर्ट से सतुंष्ट है।
Updated on:
09 Feb 2025 12:56 pm
Published on:
09 Feb 2025 12:55 pm
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