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CG POLITICS : सरोज, सौदान और कौशिक का चेहरा बदले बिना बीजेपी नहीं जीत सकेगी लोकसभा

करीब 4 घंटे में 25 से अधिक कार्यकर्ताओं को बोलने का अवसर मिला। लगभग सभी ने हार के लिए संगठन के बड़े नेताओं और मंत्रियों को जिम्मेदार ठहराया। कई बार शोर-शराबा हुआ। कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कुर्सियां तक पटक दी।

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CG POLITICS : सरोज, सौदान और कौशिक का चेहरा बदले बिना बीजेपी नहीं जीत सकेगी लोकसभा

दुर्ग/भिलाई@Patrika. भाजपा ने विधानसभा चुनाव में करारी हार की समीक्षा के साथ ही लोकसभा चुनाव के लिए स्थानीय संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मन टटोलने की पहली बार कोशिश की। गुरुवार को भिलाई व दुर्ग में दो बड़े संगठन नेताओं को भेजा। भिलाई में किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष के सामने स्थानीय संगठन के लोगों ने जमकर भड़ास निकाली। दुर्ग में तो कार्यकर्ताओं ने बड़े नेताओं के नाम लेकर उनको हार का जिम्मेदार ठहराया। जब उनको वरिष्ठों पर टिप्पणी करने पर अनुशासन में रहने को कहा तो उनका आक्रोश फूट पड़ा। हालात यह बने कि कार्यकर्ताओं ने कुर्सियां फेंककर अपनी नाराजगी जताई। दोनों जगह के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि बिना परिस्थितियां बदलें लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत मुश्किल होगी।

दिल्ली से प्रत्याशी थोपा गया तो नतीजे पिछले लोकसभा चुनाव जैसे ही रहेंगे

भाजपा कार्यालय में जिला कार्यसमिति से विधानसभा चुनाव में पराजय पर चर्चा करने प्रदेश मंत्री निरंजन सिन्हा पहुंचे। समीक्षा शुरू होते ही मंच पर खुलेआम संगठन और सरकार से जुड़े कई नेताओं ने नाम लेकर हार का ठीकरा फोड़ा गया और उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की मांग की गई। इन लोगों को अनुशासन में रहते हुए बात करने की ताकीद की गई तो उन्होंने कुर्सियां पटकने से भी गुरेज नहीं किया। समीक्षा बैठक में पूर्व विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, पूर्वजनपद उपाध्यक्ष कृष्णा देशमुख काफी मुखर रहे। दोनों नेताओं का कहना था कि लोकसभा में भी इसी तरह दिल्ली से प्रत्याशी थोपा गया तो नतीजे पिछले लोकसभा चुनाव जैसे ही रहेंगे।

पराजय के पांच कारण

1.मंत्रियों व नेताओं का अहंकार 2. एकला चलो की रणनीति3. कार्यकर्ताओं की उपेक्षा4. दिल्ली से थोपे प्रत्याशी 5. पार्टी में हावी गुटबाजी

दो दर्जन कार्यकर्ताओं ने निकाली भड़ास
करीब 4 घंटे में 25 से अधिक कार्यकर्ताओं को बोलने का अवसर मिला। लगभग सभी ने हार के लिए संगठन के बड़े नेताओं और मंत्रियों को जिम्मेदार ठहराया। कई बार शोर-शराबा हुआ। कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कुर्सियां तक पटक दी। बैठक में रमशीला साहू, जागेश्वर साहू, विजय बघेल, लाभचंद बाफना, प्रीतपाल बेलचंदन, चंद्रिका चंद्राकर, माया बेलचंदन, जिलाध्यक्ष ऊषा टावरी मौजूद थे।

एक-एक कर निकल गए नेता

बैठक में शुरू से अंत तक बड़े नेता कार्यकर्ताओं के निशाने पर रहे। इस दौरान प्रत्याशियों के व्यवहार व चुनाव लडऩे के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए गए। इस दौरान पूर्व मंत्री रमशीला साहू व पूर्व संसदीय सचिव लाभचंद बाफना भी बैठक में मौजूद थे।